चंडीगढ़ [शंकर सिंह]  देश को हथियारों की जरूरत है, कारों की नहीं। हमें रूस और जर्मनी की नीतियों से सबक लेना चाहिए। कारों की जरूरत देश के चंद अमीर लोगों को है, लेकिन हथियारों की जरूरत इस देश की संभुप्रभता और सुरक्षा के लिए जरूरी है।' यह टिप्पणी रिटायर्ड कर्नल अजय शुक्ला ने की। रिटा. कर्नल ने कहा कि, रूस और जर्मनी जैसे देश बहुत पहले ये समझ चुके थे कि उनकी क्या जरूरतें हैं। इसलिए दुनिया के सबसे हाईटेक हथियार बनाने वाले देश रूस ने कारें बनाने में अपनी टेक्नोलॉजी और साधन नहीं लगाए। रूस ने हथियार बनाए और आज इसी के दम पर देश की अर्थव्यवस्था चलती है। उन्होंने कहा कि, हम 90 फीसदी से ज्यादा हथियारों के लिए विदेशों पर निर्भर हैं। हर साल लाखों करोड़ रुपये के हथियार खरीदते हैं, जब तक यह हथियार हमारे देश में पहुंचते हैं, तब तक और हाईटेक हथियार मार्केट में आ जाते हैं। दूसरी तरफ हम जितने हथियार खरीदते हैं, उसका 10 फीसदी भी निर्यात नहीं करते हैं। यही वजह है कि हमारी अर्थव्यवस्था कमजोर हो रही है। उन्होंने माना कि, मेक इन इंडिया बेहतर कदम है, लेकिन इसके नतीजे आने में अभी समय लगेगा।

ऑर्डिनेंस फैक्टरी में अब भी बन रहे दूसरे विश्व युद्ध के हथियार : वीपी मलिक

मिलिट्री लिटरेचर फेस्टिवल के दूसरे दिन 'मिलिट्री इंडस्ट्रियल बेस एंड मेक इन इंडिया' टॉपिक पर विचार व्यक्त करते हुए रिटायर्ड जनरल वीपी मलिक ने कहा कि देश में 32 के करीब ऑर्डिनेंस फैक्ट्री हैं। लेकिन, इनमें अब भी दूसरे विश्व युद्ध के हथियार बनते हैं। उन्होंने देश को आधुनिक हथियारों को तव्वजों देने की अपील की। इसे लेकर उन्होंने एक बार पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बंद करके आधुनिक हथियारों के निर्माण की बात कही थी, लेकिन उन्होंने इसमें राजनीतिक कारणों का हवाला देकर मेरी बात को अहमियत नहीं दी। पूर्व जनरल मलिक ने कहा कि इसके अलावा एक बार उन्होंने एक नामी हथियार कंपनी के मालिक से बात ही बात में आधुनिक हथियारों का निर्माण करने की बात कही तो उन्होंने उस स्तर की टेक्नोलॉजी देश में न होने का हवाला दिया।

हम बढ़ रहे हैं, लेकिन धीमी रफ्तार से

केजे सिंह रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल केजे सिंह ने कहा कि ऐसा नहीं है कि हमने या हमारी सरकारों ने कुछ नहीं किया है। हमने अग्नि व ब्रह्मोस जैसी मिसाइल का निर्माण देश में किया है, लेकिन यह देश की जरूरतों के हिसाब से काफी कम है। हमें इस दिशा में और तेजी से काम करना होगा। तभी हम मजबूत अर्थव्यवस्था और सुरक्षित राष्ट्र की तरफ बढ़ सकते हैं।

सरकार ने जरूरत के हिसाब से नहीं बनाई पॉलिसी

रिटायर्ड ब्रिगेडियर कुतब हे ने कहा कि हथियारों के निर्माण में भारत के पिछड़ने की एक वजह विदेशी हथियार बनाने वाली कंपनी की लॉबिंग व बड़े स्तर पर दलाली भी है। इसके अलावा सरकारी एजेंसियों ने भी अपना प्रभुत्व कायम करने के लिए इस दिशा में सरकार को आगे नहीं आने दिया। जबकि रूस, जर्मनी और अमेरिका की सरकारों ने इसी दिशा में नीति बनाई, जिसका फायदा देश को मिला।

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