जागरण संवाददाता, चंडीगढ़ : पंजाब में रंगमंच की बात होती है तो दो डिपार्टमेट का नाम जरूर आता है। एक पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला और दूसरा पंजाब यूनिवर्सिटी का। दोनों ही यूनिवर्सिटी के थिएटर डिपार्टमेट से नामी कलाकार निकले। पटियाला में पढ़ाई के दौरान मैं भी अनेक बार चंडीगढ़ आता रहा। यहां का टैगोर थिएटर मुझे सबसे ज्यादा पसंद रहा, जहां कोई भी अपना नाटक करना सौभाग्य समझता था। मैंने अनेकों पंजाबी नाटक इसी मंच पर किए, जो मुझे हमेशा याद रहे। एक्टर लक्खा लखविंदर चंडीगढ़ में बिताए अपने दिनों को याद करते हुए कुछ यूं बोले। वह एलांते मॉल में अपनी फिल्म की प्रोमोशन के लिए पहुंचे। चंडीगढ़ आज भी पेरिस की तरह

लखविंदर ने कहा कि चंडीगढ़ का डिजाइन मुझे बहुत भाता है। यह ऐसा लगता है कि किसी विदेश में घूम रहे हो। मुंबई में इन दिनों ज्यादातर रहना होता है, ऐसे में इस शहर की याद अकसर आती है। कम भीड़ और बेहतरीन सड़कें, आप सुकून से यहां घूम सकते हैं और चाहे तो किसी गार्डन में आराम से बैठ भी सकते हैं। उम्मीद है कि इस शहर को भी विकास की ऐसी नजर न लगे कि ये भी दिल्ली और मुंबई की तरह आबादी से भर जाए, इसे ऐसे ही रहना चाहिए, हरा भरा और जानदार। अपनी बात करूं तो यहां के कई रंगकर्मी डॉ रानी बलबीर कौर, महेंद्र कुमार जैसे लोगों के साथ काम करने का मौका मिला, जहां कई चीजें सीखी भी। उसी की मदद से आज भी मुंबई और पंजाबी सिनेमा में सर्वाइव कर पा रहा हूं। जल्द ही सर्जिकल स्ट्राइक पर आधारित एक फिल्म में काम कर रहा हूं, जिसमें में सर्जिकल स्ट्राइक करने वाला एक फौजी का किरदार निभा रहा हूं, वो भी पंजाबी जो में हूं भी।

Posted By: Jagran

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