जागरण संवाददाता, चंडीगढ़ : अमूमन देखा जाता है कि वर्कशाप में कोई वाहन ठीक होने जाता है तो उसका प्रयोग नहीं किया जाता। लेकिन एक मामला ऐसा भी आया है जहां पर वर्कशाप में ठीक होने के लिए गई कार एक हिट एंड रन केस में शामिल हुई और उस हादसे में एक छह साल के बच्चे की मौत हो गई। साल 2018 में शिमला के रहने वाले कमल कांत कालिया ने अपनी कार में कुछ तकनीकी खराबी आने की वजह से उसे ठीक होने के लिए चंडीगढ़ औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 स्थित रेनोल्ट के शोरुम ले जाया गया। वर्कशाप में जाने के बाद कार हिट एंड रन में शामिल हो जाती है। कार क्षतिग्रस्त होने की वजह से उन्होंने कंपनी से उसे ठीक करने की मांग की लेकिन रेनोल्ट ने मना कर दिया। शिकायतकर्ता ने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दी जहां कंपनी पर मानसिक परेशान करने के लिए तीन लाख रुपये हर्जाना और कार क्षतिग्रस्त होने पर कंपनी को सात लाख रुपये देने का आदेश दिया गया।

पुलिस की काल से मिली पूरी जानकारी

शिकायतकर्ता ने बताया कि उन्होंने कंपनी के कार्यालय में काल किया तो वहां पर एक वरिष्ठ कर्मचारी ने काल पिक कर उसे वाहन के दस्तावेज भेजने के लिए कहा। लेकिन शिकायतकर्ता ने उसे दस्तावेज भेजने से इनकार कर दिया और कहा कि वह स्वंय उक्त वाहन को लेने के लिए वहां आ जाएगा। इसी दौरान 17 जुलाई 2018 को पंचकूला सेक्टर-14 पुलिस स्टेशन से शिकायतकर्ता को काल आया कि उनका वाहन 15 जुलाई 2018 को हिट एंड रन मामले में शामिल था जिसमें छह साल के लड़के की मौत हो गई थी।

कंपनी के कर्मचारी के खिलाफ जारी हुआ था गैर जमानती वारंट

18 जुलाई 2018 को शिकायतकर्ता तुरंत थाने गया और पुलिस ने उक्त वाहन को औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 स्थित रेनोल्ट के शोरूम से बरामद किया। इस मामले को लेकर शिकायतकर्ता ने तमिल नाडू स्थित रेनोल्ट से संपर्क किया जिसमें घटना का पूरा विवरण बताया गया था, लेकिन उन्होंने किसी भी प्रकार की सहायता देने से इन्कार कर दिया और जांच करने के साथ इस मामले में शामिल कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई करने से इन्कार कर दिया। बाद में पता चला कि कार को उस समय कंपनी का कर्मचारी प्रदीप चला रहा था और उक्त चालक के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया था।

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