इन्द्रप्रीत सिंह, चंडीगढ़: लुधियाना नगर निगम चुनाव में आम आदमी पार्टी के झाड़ू से खुद उसका घर ही साफ हो गया है। पार्टी के हाथ 36 में से मात्र एक सीट ही लगी है, हालांकि नगर निगम चुनाव में कब्जा करने का दावा करने वाली उनकी सहयोगी लोक इंसाफ पार्टी ने भी उम्मीद से ज्यादा लचर प्रदर्शन किया। लोक इंसाफ पार्टी ने 59 सीटों पर चुनाव लड़ा और उनके हाथ मात्र सात सीटें ही आई। पंजाब में चार साल पुरानी पार्टी, जिसने 2014 के संसदीय चुनाव में चार सीटें लेकर वैकल्पिक राजनीति करने का दावा किया था, उसकी हालत यह हो गई है कि पूरे पंजाब में उनके मात्र दो पार्षद ही जीत पाए हैं। चार संसदीय सीटें जीतकर इतरा रही आम आदमी पार्टी ने विधानसभा चुनाव के दौरान किसी भी छोटे दल के साथ गठजोड़ करने से साफ मना कर दिया था और शर्त रखी कि जो पार्टी उनके साथ आना चाहती है, उसे अपने दल को आप में मर्ज करना होगा। यही कारण रहा कि विधानसभा चुनाव में सत्ता में आना तो दूर उनके हाथ मात्र 20 सीटें ही लगीं। लुधियाना नगर निगम के चुनाव में भी पंजाब की प्रमुख विपक्षी पार्टी को लोक इंसाफ पार्टी की पिछलग्गू के तौर पर काम करना पड़ा। लोक इंसाफ पार्टी, जिसके पास लुधियाना में दो विधानसभा की सीटें हैं, वह भी निगम चुनाव में मात्र 7 सीटों पर ही सिमट कर रह गई है। सवाल लोक इंसाफ पार्टी का नहीं, बल्कि आप का है, जो मात्र एक साल पहले इन्हीं दिनों में पंजाब की सत्ता पर काबिज होने के सपने देख रही थी। आज प्रदेश में दो पार्षदों की सीटें भी नहीं जीत पा रही है। चार अध्यक्ष बदले चार साल पुरानी पार्टी इन चार सालों में चार अध्यक्ष बदलकर भी देख चुकी है, इसके बावजूद उनकी साख गिरती जा रही है। लोकसभा में 25 फीसद वोट शेयर लेने वाली पार्टी को लुधियाना में लड़ने के लिए उम्मीदवारों की मिन्नतें तक करनी पड़ीं। सबसे पहले सुमेल सिंह सिद्धू के हाथ बागडोर सौंपकर पार्टी ने उनकी जगह सुच्चा सिंह छोटेपुर, गुरप्रीत घुग्गी और अब भगवंत मान को भी अपना कर देख लिया है। मात्र एक साल में विधानसभा में अपना विपक्ष का नेता भी बदल दिया, लेकिन आप के नेताओं से रुष्ट हुए वोटरों को फिर से अपने पाले में लाने की सफलता पार्टी को नहीं मिल रही है। दस साल बाद कांग्रेस फिर से लुधियाना नगर निगम पर काबिज आखिरकार दस साल के लंबे अंतराल के बाद कांग्रेस ने लुधियाना नगर निगम की सत्ता पर कब्जा जमा लिया। हालाकि, जालंधर, अमृतसर और पटियाला की तरह कांग्रेस का एकतरफा दबदबा लुधियाना में नहीं चल पाया, लेकिन 95 में से 62 सीटें जीत कांग्रेस ने बहुमत प्राप्त कर शहर के मेयर की सीट पर अपनी मुहर लगा ली। अकाली दल ने 11 सीटें हासिल की और सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के साथ नेता प्रतिपक्ष अपना बना लिया। अकाली दल की गठबंधन पार्टी भारतीय जनता पार्टी 10 सीटों के साथ तीसरे स्थान पर रही। लुधियाना निगम चुनाव में आम आदमी पार्टी का झाड़ू पूरी तरह से गायब हो गया और उसे एक ही सीट मिली। यह सीट आप के जिला प्रधान दलजीत सिंह भोला की पत्नी बलविंदर कौर ने जीती। निगम चुनाव में सबसे बुरी हालत बैंस बंधुओं की रही। लोक इंसाफ पार्टी ने 59 वार्ड में अपने उम्मीदवार खड़े किए थे, लेकिन उन्हें सात सीटों पर ही कामयाबी मिली।

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