-कॉन्फलिक्ट ऑफ इंट्रस्ट-2018 प्राइवेट बिल के लिए स्पीकर को सौंपा माग पत्र

-काग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में किया था वादा, अब भूली

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राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़: आम आदमी पार्टी पंजाब के उपप्रधान व सुनाम से विधायक अमन अरोड़ा ने वीरवार को 'हितों के टकराव' के मुद्दे पर कानून बनाने के लिए विधानसभा के स्पीकर राणा केपी सिंह को प्राइवेट मेंबर बिल 'द पंजाब अनसिटिंग ऑफ मेंबर्स ऑफ पंजाब लेजिस्लेटिव असेंबली फाउंड गिल्टी ऑफ कन्फलिक्ट ऑफ इंट्रस्ट बिल-2018' सौंपते हुए आगामी बजट सत्र के दौरान इसे सदन में पेश करने की इजाजत मागी है। उन्होंने मीडिया को बताया कि इस बिल के पेश होने के बाद अगर कानून बन जाता है, तो कोई भी नेता अपने निजी हितों के लिए अपने पद का दुरुपयोग नहीं कर सकेगा। आप विधायक कंवर संधू ने कहा कि विदेश में यह कानून है, तो हमारे यहा क्यों नहीं।

एक सवाल के जवाब में अरोड़ा ने बताया कि 'हितों के टकराव' संबंधित इस बिल के दायरे में मुख्यमंत्री, मंत्री और सभी विधायक शामिल होंगे। यदि इनमें से कोई भी सत्ता और अपने रुतबे का दुरुपयोग करते हुए सरकारी खजाने की कीमत पर अपना निजी लाभ लेता है, तो 6 महीनों के अंदर-अंदर उस विधायक को उसके पद से बर्खास्त कर दिया जाए। अमन अरोड़ा ने बताया कि बिल का उद्देश्य ही सत्ता और पद के दुरुपयोग को रोकना है। इसलिए जो भी जनप्रतिनिध अपने निजी हितों, वित्तीय और व्यापारिक लेन-देन में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष तौर पर राज्य और राज्य की जनता के हितों को दाव पर लगाने का आरोपी पाया जाता है, तो उसकी बतौर विधायक सदस्यता रद कर दी जाए।

अमन अरोड़ा ने सरकार की नीति और नीयत पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि यह बात समझ में नहीं आ रही कि सरकार ने इस दिशा में उचित व ठोस कदम क्यों नहीं उठाए? इस कानून को लागू करने के लिए सरकारी खजाने पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी नहीं पड़ता।

पाच सदस्यीय आयोग गठित करने की सलाह

अमन अरोड़ा ने इस बिल को पारदर्शिता के साथ लागू करने के लिए पाच सदस्यीय आयोग गठित करने की सलाह दी। इस आयोग का प्रमुख सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट का पूर्व जज हो और बाकी चार सदस्य कानून, अर्थशास्त्र, पत्रकारिता, रक्षा सेवाएं और शिक्षा आदि के क्षेत्र में अहम योगदान डालने वाले बेदाग शख्सियतों में से लिए जाएं। इस आयोग की अवधि 6 वर्ष के लिए हो और आयोग के प्रमुख और सदस्यों के चुनाव के लिए 'सिलेक्ट कमेटी' में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और वरिष्ठता के अनुसार दूसरा वरिष्ठ जज, मुख्यमंत्री, स्पीकर और नेता प्रतिपक्ष शामिल हों। उन्होंने स्पीकर को काग्रेस के चुनावी घोषणा पत्र में किए गए वादे को याद करवाते हुए कहा कि अफसोस की बात है कि बिल को लेकर आने की वादा-खिलाफी की है। अपने एक वर्ष के कार्यकाल, तीन विधानसभा सत्रों और अनगिनत कैबिनेट बैठकें करने के बावजूद सरकार इस बिल को पूरी तरह भूल चुकी है।

Posted By: Jagran

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