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62 की उम्र में 14,500 फीट चढ़ाई...सेवानिवृत्ति जीवन की दूसरी पारी की शुरुआत को चंडीगढ़ के संधू ने किया साबित

Published: Fri, 18 Sep 2026 12:54 PM (IST)

चंडीगढ़ के सेवानिवृत्त लेक्चरर शमशेर संधू ने 62 वर्ष की उम्र में हिमाचल प्रदेश के हमटा पास का चुनौतीपूर्ण ट्रैक ...और पढ़ें

14,500 फीट ऊंचे हमटा पास पर ट्रैकिंग के दौरान शमशेर संधू (लाल टी-शर्ट)।

14,500 फीट ऊंचे हमटा पास पर ट्रैकिंग के दौरान शमशेर संधू (लाल टी-शर्ट)।

HighLights

  1. शमशेर संधू ने 62 वर्ष की उम्र में हमटा पास ट्रैक पूरा किया।

  2. सेवानिवृत्ति के बाद रोमांचक जीवन को चुना, पत्नी से प्रेरित हुए।

  3. 14,500 फीट की ऊंचाई पर हमटा पास फतह कर प्रेरणा दी।

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। सेवानिवृत्ति जीवन का अंत नहीं, बल्कि दूसरी पारी की शुरुआत है। इसे साबित किया है चंडीगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग के सेक्टर-16 स्थित सरकारी स्कूल से करीब तीन दशक की सेवा के बाद लेक्चरर पद से सेवानिवृत्त शमशेर संधू ने।

62 वर्ष की उम्र में उन्होंने छह सदस्यीय टीम के साथ हिमाचल प्रदेश के जाबरी से चत्रु तक का चुनौतीपूर्ण हमटा पास ट्रैक पूरा किया। टीम के अन्य सदस्य 20 से 30 वर्ष की उम्र के थे। संधू ने 13 सितंबर को जाबरी से ट्रैक शुरू किया।

तेज बारिश के बीच चार किलोमीटर का सफर तय कर शाम करीब 7:30 बजे चिका पहुंचे। करीब 11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित चिका में टेंट में रात बिताई। ठंड के बीच अपने बर्तन भी स्वयं साफ किए। इस दौरान एक साथी ने ट्रैक छोड़ दिया।

14 सितंबर को चिका से सात किलोमीटर दूर बाली का घेरा पहुंचे। अगले दिन सुबह छह बजे करीब आठ किलो वजन पीठ पर लेकर कठिन चढ़ाई शुरू की। दोपहर तीन बजे 14,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित हमटा पास पहुंचे। कम ऑक्सीजन और कठिन चढ़ाई के बाद करीब 70 डिग्री की खड़ी ढलान पार कर 13,500 फीट ऊंचे शिया गुरु पहुंचे।

सितारों भरी रात ने किया रोमांचित

शिया गुरु में साफ आसमान के नीचे आकाशगंगा और असंख्य सितारों को देखकर संधू भावुक हो गए। उन्हें चंडीगढ़ में बचपन के दिनों का साफ आसमान याद आया। अगले दिन शिया गुरु से करीब सात घंटे में चत्रु पहुंचे। इसके बाद वाहन से चंद्रताल झील का भ्रमण किया।

पत्नी ने किया प्रेरित

संधू बताते हैं कि इस ट्रैक के लिए पत्नी ने उन्हें काफी प्रेरित किया। सेवानिवृत्ति के बाद लोगों ने गणित की अकादमी शुरू करने की सलाह दी, लेकिन उन्होंने रोमांचक जीवन को चुना। उनका कहना है कि स्वास्थ्य ने साथ दिया तो अगला ट्रैक बर्फीले पहाड़ों में होगा। उन्होंने कहा कि रिटायरमेंट जीवन का अंत नहीं, भगवान की दी हुई दूसरी पारी है। अच्छे स्वास्थ्य और संतोष के साथ इसे जीना चाहिए।