दुनियाभर में छाए चंडीगढ़ PU के 56 वैज्ञानिक; चिकित्सा, पर्यावरण और इंजीनियरिंग में शोध से मिली पहचान
पंजाब यूनिवर्सिटी के 56 शोधकर्ताओं ने स्टैनफोर्ड-एल्सेवियर की दुनिया के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में जगह बनाई है। ...और पढ़ें

दुनिया के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में पीयू के 56 वैज्ञानिक। (सांकेतिक फोटो)
HighLights
पीयू के 56 शोधकर्ता स्टैनफोर्ड-एल्सेवियर की शीर्ष सूची में।
54 को एक साल के शोध प्रभाव के आधार पर मिली जगह।
एआई मॉडल, कैंसर रोधी अणु जैसे नवाचार भी शामिल।
जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। चिकित्सा से लेकर पर्यावरण विज्ञान और इंजीनियरिंग तक, विभिन्न क्षेत्रों में किए जा रहे शोध के दम पर पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) के 56 शोधकर्ताओं ने वैश्विक पहचान बनाई है।
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और एल्सेवियर की ओर से जारी वर्ष 2026 की दुनिया के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में इन शोधकर्ताओं को शामिल किया गया है। यह पहचान शोधकर्ताओं की ओर से उनके काम के संदर्भ दिए जाने के आधार पर किए गए आकलन से जुड़ी है।
सूची में पीयू के 54 शोधकर्ता एक साल के शोध प्रभाव वाली श्रेणी में शामिल हैं, जबकि 28 को पूरे करियर के शोध प्रभाव वाली श्रेणी में जगह मिली है। दोनों श्रेणियों में 26 शोधकर्ताओं के नाम साझा हैं।
इस तरह कुल 56 अलग-अलग शोधकर्ताओं को सूची में शामिल किया गया है। एक साल के शोध प्रभाव वाली श्रेणी में वर्ष 2025 के दौरान मिले उदाहरणों को आधार बनाया गया है।
वहीं, पूरे करियर वाली श्रेणी में वर्ष 2025 के अंत तक शोधकर्ताओं के काम को मिले कुल उदाहरणों के आधार पर आकलन किया गया है। सूची अगस्त 2026 के स्कोपस आंकड़ों पर आधारित है।
यह 28 शोधकर्ता का नाम
पूरे करियर के शोध योगदान के आधार पर शामिल 28 शोधकर्ताओं में केवल कृष्ण, हर्ष नैय्यर, भूपिंदर सिंह भूप, सुरिंदर कुमार मेहता, हरमिंदर पाल सिंह, संतोष कुमार उपाध्याय, सुशील कुमार कंसल, सूर्यकांत त्रिपाठी, गार्गी घोषाल, डेजी रानी बतीश, लोकेश अशोक कुमार, मदन एम. अग्रवाल, आरके कोहली, सुमन मोर, सोनल सिंघल, ओम प्रकाश कटारे, नीरा गर्ग, अनुराग कुहाड़, सुशील कुमार तोमर, प्रिंस के. शर्मा, जसविंदर सिंह, श्रीनिवास कृष्णराव कुलकर्णी, अनिल कुमार, कंवलजीत के. चोपड़ा, आइपी कौर, विवेक रंजन सिन्हा, विशाल गुप्ता और हरमेश कुमार शामिल हैं।
संदिग्ध हस्ताक्षरों की पहचान करेगा पीयू का एआई माॅडल
पंजाब विश्वविद्यालय के मानव विज्ञान विभाग के प्रो. केवल कृष्ण के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने असली और जाली हस्ताक्षरों की पहचान के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) आधारित मॉडल विकसित किया है।
1400 हस्ताक्षरों पर प्रशिक्षित इस माडल की सटीकता 84.5 प्रतिशत है। भारत सरकार ने साफ्टवेयर को कॉपीराइट प्रदान किया है। यह फोरेंसिक जांच में मददगार होगा।
भुई आंवला के बैक्टीरिया से मिला कैंसर रोधी प्राकृतिक अण
पंजाब विश्वविद्यालय के माइक्रोबियल बायोटेक्नोलाजी विभाग के प्रो. रोहित शर्मा, बायोटेक्नोलाजी विभाग की डाॅ. मोनिका शर्मा और पूर्व शोधार्थी डाॅ. श्रुति नागरथ ने भुई आंवला के पौधे में पाए जाने वाले बैक्टीरिया से प्राकृतिक अणु खोजा है। प्रयोगशाला परीक्षण में इसने एक्यूट टी-सेल ल्यूकेमिया की कैंसर कोशिकाओं पर असर दिखाया।
