चंडीगढ़, जेएनएन। कोरोना महामारी की वजह से जिला अदालत में केसों की पेंडेंसी बढ़ती जा रही है। मार्च महीने से ही पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के आदेशों के बाद से सिर्फ जरूरी केसों में ही वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए सुनवाई हो रही है। ऐसे में पुराने मामले जिनमें सबूत पेश किए जाने है या गवाहों के गवाह होने है, वह हो ही नहीं पा रही है। ऐसे केसों में हर बार तारीख पर तारीख मिल रही है।

अदालत में शारीरिक रूप से उपस्थित होकर केसों की सुनवाई नहीं होने पर क्लांइट के साथ वकील भी परेशान हैं, जिसके चलते वह अब 13 अक्टूबर से भूख हड़ताल और धरना प्रदर्शन भी करने जा रहे हैं। शारीरिक रूप से उपस्थित होकर केसों की सुनवाई नहीं होने की वजह से केसों की पेडेंसी बढ़ती जा रही है। जिला अदालत में कुल अभी तक 54244 केस पेंडिंग है। इसमें 20028 सिविल और 34196 क्रिमिनल केस हैं।

बीते सितंबर महीने में सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट्स से उनके अधीनस्थ कोर्ट्स में लंबे समय से चल रहे केसों की जानकारी मांगी थी। बता दें कि चंडीगढ़ जिला अदालत में पांच एेसे केसों में सुनवाई अभी भी चल रही है जिनका निपटारा बीते 25 वर्षों से नहीं हो सका है। इनमें तीन मेटर्स सिविल और दो क्रिमिनल केस हैं। ये केसों में वर्ष 1993 से सुनवाई चल रही है। दो मामले 1993, दो 1996 अौर एक 1994 का है।

28 जज मौजूद, दो पोस्टें पड़ी हैं खाली

जिला अदालत में कुल 30 जजों के पद है। इनमें एक एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज, आठ एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज, एक स्पेशल सीबीआइ जज अौर 20 ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट हैं। लेकिन इनमें से अभी 28 जज ही मौजूद हैं। जिला अदालत के डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज परमजीत सिंह बीती 30 सितंबर को रिटायर से हुए थे। उसके बाद से ही पोस्ट खाली पड़ी है। वहीं चीफ ज्यूडिश्यल मजिस्ट्रेट की पोस्ट भी 19 जनवरी से खाली पड़ी है। उनकी जगह जज तेजप्रताप सिंह रंधावा को एडिशनल चार्ज दिया हुआ है। सीजेएम की पोस्ट पिछले करीब नौ महीने से खाली पड़ी है।

 

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