चंडीगढ, [इन्‍द्रप्रीत सिंह]। पंजाब सरकार ने पंजाब ग्राउंड वाटर रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट अथारिटी को राज्य के उद्योगों और और व्यापारिक संस्थानों को बिल अदा करने पर भूजल के उपयोग की मंजूरी दे दी है। अथारिटी सचिव अरुणजीत सिंह मिगलानी ने इसकी पुष्टि की है। अथारिटी जल्द ही इसका नोटिफिकेशन जारी कर देगी।

पंजाब ग्राउंड वाटर रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट अथारिटी ने दरें तय कीं

सरकार की मंजूरी मिलने के बाद राज्य के उन ब्लाकों में भी नए उद्योग लगाने और पुराने उद्योगों का विस्तार हो सकेगा जहां भूजल चिंतनीय स्तर तक गिर चुका है। भूजल को निकालने के एवज में उद्योगों और व्यापारिक संस्थानों को अथारिटी को बिल का भुगतान करना होगा। इस पैसे को अथारिटी भूजल को रिवाइव करने की योजनाओं पर खर्च करेगी।

ग्रीन, येलो और आरेंज तीन जोन में बांटे गए उद्योग

गौरतलब है कि इससे पहले डार्क जोन में उद्योग लगाने या पुराने उद्योगों के विस्तार के लिए केंद्रीय भूजल अथारिटी से मंजूरी लेनी पड़ती थी। परंतु क्रिटिकल डार्क जोन में ऐसा करने की मंजूरी नहीं मिल रही थी। अब सरकार ने भूजल के लिए पैसा अदा करके नए उद्योग लगाने व पुराने के विस्तार के लिए बीच का रास्ता खोल दिया है।

अथारिटी ने उद्योगों और व्यावसायिक संस्थानों को बड़े, मध्यम और छोटे के रूप में पहचान करने के बजाए इसे पानी की खपत पर छोड़ दिया है। इसके लिए ग्रीन, येलो और आरेंज तीन जोन बनाए गए हैं। पहले तीन सौ क्यूबिक मीटर भूजल के प्रयोग पर कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा। इसके बाद लगने वाली दरें तय कर दी गई हैं।

भूजल बचाने पर बिल में छूट

अथारिटी की ओर से इस बात का प्रविधान भी किया गया है कि अगर उद्योग भूजल बचाएंगे तो बिल में छूट भी दी जाएगी। इसके लिए प्रति क्यूबिक मीटर 2.5 रुपये की छूट दी जाएगी लेकिन इसकी भी एक सीमा निश्चित होगी।

घरेलू और कृषि क्षेत्र को छूट, कालोनी मालिक को देना होगा पैसा

अथारिटी सचिव अरुणजीत सिंह मिगलानी ने यह भी कहा कि घरेलू क्षेत्र में व्यक्तिगत घर और कृषि को इससे बाहर रखा गया है लेकिन अगर कोई कालोनी है तो उसके मालिक को भूजल दोहन पर पैसा देना होगा। गुरुद्वारों, मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों को भी छूट रहेगी।

इसलिए उठाना पड़ा यह कदम

पंजाब में भूजल लगातार गिरता जा रहा है। भूजल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार पंजाब में भूजल का दोहन 165 फीसद तक पहुंच चुका है। 150 में से 109 ब्लाक में भूजल का दोहन अत्यधिक मात्रा में हो रहा है। इनमें से 11 ब्लाक की स्थिति अत्यंत गंभीर है। इसका असर नए उद्योगों पर भी हो रहा है।

यह है जोन का गणित

ग्रीन जोन : जितना पानी हर साल रीचार्ज होता है और उतने पानी का ही दोहन होता है।

येलो जोन : जितना पानी हर साल रीचार्ज होता है और उससे दोगुना पानी का दोहन होता है।

आरेंज जोन : जितना पानी हर साल रीचार्ज होता है और उससे तीन गुना पानी का दोहन होता है। जिला लुधियाना, संगरूर, जालंधर और मोगा इस जोन में हैं।

 इतनी होंगी दरें ..

जोन खपत 300 से 1500 तक 1500 से 50000 तक 15000 से 75000 तक 75000 से ज्यादा

ग्रीन जोन 4 रुपये 6 रुपये 10 रुपये 14 रुपये

येलो जोन 6 रुपये 9 रुपये 14 रुपये 18 रुपये

आरेंज 8 रुपये 12 रुपये 18 रुपये 22 रुपये

(नोट : खपत क्यूबिक मीटर और दर प्रति क्यूबिक के हिसाब से)

 

Edited By: Sunil Kumar Jha