-केंद्र सरकार की आपत्ति के बाद किया गया उम्रकैद के बिल में संशोधन

-पूर्व सरकार ने उम्रकैद के प्रावधान का बिल पास किया था

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राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़: पंजाब सरकार ने मंगलवार को सदन में पांच महत्वपूर्ण बिल पास किए। इनमें धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी पर दस साल की सजा का प्रावधान और डीजीपी के चयन के लिए राज्य का आयोग बनाना मुख्य रहे। बिल के अनुसार धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी पर अब 10 साल की सजा होगी। कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर (पंजाब अमेंडमेंट) बिल-2018 और इंडियन पीनल कोड (पंजाब अमेंडमेंट) बिल -2018 को विधानसभा ने सर्वसम्मति से पास कर दिया। हालांकि, अकाली दल का तर्क था की श्री गुरुग्रंथ साहिब एक मात्र ऐसा ग्रंथ है, जिसे जीता जागता स्वरूप माना गया है। अत: इसकी बेअदबी पर सजा का प्रावधान भी अधिक होना चाहिए। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि पूर्व सरकार ने गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी होने पर उम्रकैद के प्रावधान करने का बिल पास किया था, लेकिन केंद्र सरकार ने इसे यह कहते हुए निरस्त कर दिया कि देश में किसी एक धर्म के लिए अलग सजा का प्रावधान नहीं किया जा सकता। इसलिए फिर दस साल की सजा का प्रावधान किया गया है।

महत्वपूर्ण बदलाव

मंत्रिमंडल ने आइपीसी में धारा 295-एए शामिल करने की मंजूरी दे दी है।

-संशोधित बिल के अनुसार जो भी व्यक्ति धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से पवित्र श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी, श्रीमद भगवद गीता, पवित्र कुरान और पवित्र बाइबल का नुकसान या बेअदबी करेगा, उसे दस साल की सजा होगी।

-पुराने बिल के स्थान पर अब 'द कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर (पंजाब अमेंडमेंट) बिल -2018 और इंडियन पीनल कोड (पंजाब अमेंडमेंट) बिल -2018 को विधान सभा ने पास कर दिया है। यूपीएससी को नहीं भेजना होगा डीजीपी के चयन के लिए पैनल, मुख्यमंत्री होंगे आयोग के चेयरमैन

पंजाब पुलिस एक्ट -2007 में संशोधन करके राज्य आयोग बनाने का बिल विधानसभा में सर्वसम्मति के साथ पास हो गया है। पंजाब पुलिस (संशोधन) बिल -2018 मंगलवार को सदन पेश हुआ। इस बिल के पास हो जाने से अब सरकार को डीजीपी नियुक्त करने के लिए तीन पुलिस अधिकारियों का पैनल यूपीएससी को नहीं भेजना पड़ेगा। राज्य आयोग ही डीजीपी लगाने को लेकर फैसला लेगी। इस आयोग के चेयरमैन मुख्यमंत्री होंगे। गृह मंत्री इसके सदस्य होंगे। मुख्यमंत्री के पास गृह विभाग की जिम्मेदारी होने पर उन्हें यह अधिकार होगा कि वह गृह मंत्री के स्थान पर सदस्य बना सकते हैं। नेता प्रतिपक्ष भी इसके सदस्य होंगे। इसके अलावा हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज, चीफ सेक्रेटरी, गृह विभाग के होम सेक्रेटरी, एजी पंजाब, आम जनता के दो सदस्य, जिसे सरकार नियुक्त करेगी एवं डीजीपी मेंबर सेक्रेटरी होंगे। 3 जुलाई को अदालत के आदेशों में सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को हिदायत दी थी कि जब भी डायरेक्टर जनरल का पद खाली हो, उस पद पर सेवा निभा रहे अधिकारी की सेवामुक्ति की तारीख से कम से कम तीन महीने पहले ही यूपीएससी की हिदायतों के मुताबिक पैनल तैयार किया जाएगा। इससे राज्य अपने पुलिस प्रमुख का चयन कर सकेगा।

Posted By: Jagran

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