करार खत्म होते ही बठिंडा एयरपोर्ट पर फिर लगा ताला, दिल्ली की उड़ान बंद होने से पसरा सन्नाटा
बठिंडा से दिल्ली के लिए अलाइंस एयर की उड़ान बुधवार से पूरी तरह बंद हो गई है, जिससे बठिंडा एयरपोर्ट एक बार फिर वीरान हो गया है।
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बठिंडा एयरपोर्ट पर दिल्ली उड़ान बंद होने से फिर पसरा सन्नाटा।
HighLights
अलाइंस एयर की बठिंडा-दिल्ली उड़ान बुधवार से पूरी तरह बंद।
क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना के तहत शुरू हुई सेवा का करार समाप्त।
एयरपोर्ट कमेटी ने नियमित सेवा बहाली के लिए सरकार से हस्तक्षेप मांगा।
साहिल गर्ग, बठिंडा। बठिंडा के हवाई यात्रियों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। दिल्ली के लिए उड़ान भरने वाली अलाइंस एयर की फ्लाइट बुधवार से पूरी तरह बंद हो गई है। बठिंडा एयरपोर्ट पर कंपनी की ओर से स्थापित किया गया अपना सेटअप भी सरेंडर कर दिया गया है।
तीन साल पहले क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना (आरसीएस) के तहत शुरू हुई यह हवाई सेवा करार आगे नहीं बढ़ने के कारण बंद हुई है। उड़ान बंद होते ही बठिंडा एयरपोर्ट एक बार फिर वीरानी की ओर लौट गया है।
ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब क्षेत्रीय शहरों को हवाई नेटवर्क से जोड़ने की बात हो रही है तो बठिंडा जैसे महत्वपूर्ण औद्योगिक और शैक्षणिक केंद्र को नियमित हवाई सेवा से वंचित क्यों किया जा रहा है।
अलाइंस एयर की उड़ान बठिंडा के लिए सिर्फ एक हवाई सेवा नहीं थी, बल्कि दिल्ली से सीधी कनेक्टिविटी का महत्वपूर्ण माध्यम थी। बठिंडा में स्थित एम्स, रिफाइनरी, सेंट्रल यूनिवर्सिटी सहित कई बड़े संस्थानों के अधिकारी और कर्मचारी दिल्ली आने-जाने के लिए इस सेवा पर निर्भर थे।
इसके अलावा कारोबारियों, मरीजों, विद्यार्थियों और आम यात्रियों के लिए भी यह उड़ान समय और दूरी दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित हो रही थी। अब इसके बंद होने से इन यात्रियों को सड़क या लंबी रेल यात्रा पर निर्भर होना पड़ेगा।
पहले सात दिन, फिर पांच, तीन और दो दिन... आखिरकार पूरी तरह बंद
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जिस हवाई सेवा को बठिंडा की कनेक्टिविटी मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था, उसकी आवृत्ति धीरे-धीरे लगातार घटती चली गई। शुरुआत में अलाइंस एयर की फ्लाइट सप्ताह के सातों दिन संचालित होती थी। इसके बाद इसे घटाकर पांच दिन किया गया।
फिर सेवा तीन दिन और आखिर में महज दो दिन तक सीमित कर दी गई। अब करार समाप्त होने के साथ यह सेवा पूरी तरह बंद हो चुकी है। यानी बठिंडा के यात्रियों को नियमित हवाई सेवा देने के बजाय उड़ान को धीरे-धीरे सीमित किया गया और अंततः एयरपोर्ट से सेवा ही हटा दी गई। इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ा है, जिन्हें कम समय में दिल्ली पहुंचना होता है।
फ्लाई बिग की फ्लाइट पहले हो चुकी है बंद
बठिंडा एयरपोर्ट की स्थिति पहले से ही चुनौतीपूर्ण रही है। फ्लाई बिग की 17 सीटों वाली फ्लाइट भी पिछले करीब डेढ़ साल से बंद पड़ी है। इसके अलावा इससे पहले एयर इंडिया की ओर से बठिंडा से दिल्ली और जम्मू के लिए उड़ानें संचालित की जाती थीं, लेकिन कोरोना काल के दौरान ये सेवाएं बंद कर दी गई थीं। इसके बाद करीब तीन साल तक एयरपोर्ट लगभग सुनसान पड़ा रहा।
2023 में जगी थी उम्मीद, तीन साल में फिर बुझी; एयरपोर्ट कमेटी ने सरकार से मांगा हस्तक्षेप
साल 2023 में जब बठिंडा से दोबारा हवाई सेवा शुरू हुई तो यात्रियों और क्षेत्र के लोगों में उम्मीद जगी थी कि अब बठिंडा एयरपोर्ट नियमित रूप से सक्रिय रहेगा और यहां से देश के दूसरे प्रमुख शहरों के लिए भी कनेक्टिविटी बढ़ेगी। लेकिन महज तीन साल बाद अलाइंस एयर की सेवा बंद होने से ये उम्मीदें फिर धूमिल हो गई हैं।
एयरपोर्ट कमेटी के सदस्यों का कहना है कि बठिंडा से उड़ान नियमित करवाने के लिए लंबे समय तक प्रयास किए गए थे। काफी कोशिशों के बाद सेवा शुरू हुई थी, लेकिन अब दोबारा बंद होने से क्षेत्र के यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। कमेटी की ओर से भारत सरकार से मांग की गई है कि बठिंडा एयरपोर्ट से नियमित हवाई सेवा बहाल करवाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।एयरपोर्ट कमेटी की चेयरपर्सन एवं सांसद
हरसिमरत कौर बादल को भी इस संबंध में पत्र भेजा गया है। कमेटी सदस्यों का कहना है कि बठिंडा केवल एक सामान्य शहर नहीं है, बल्कि यहां एम्स, रिफाइनरी, सेंट्रल यूनिवर्सिटी और अन्य महत्वपूर्ण संस्थान मौजूद हैं। ऐसे में इस क्षेत्र को मजबूत हवाई कनेक्टिविटी की जरूरत है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि बठिंडा एयरपोर्ट को बार-बार शुरू और बंद होने वाली उड़ानों के भरोसे कब तक रखा जाएगा। यदि हवाई सेवा नियमित और व्यावहारिक रूप से संचालित नहीं होती तो करोड़ों रुपये की लागत से तैयार एयरपोर्ट का उद्देश्य भी अधूरा रह जाता है।
क्षेत्र के लोगों की मांग है कि सरकार महज औपचारिकता पूरी करने के बजाय बठिंडा से नियमित दिल्ली सेवा और अन्य प्रमुख शहरों के लिए हवाई कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने की दिशा में स्थायी समाधान निकाले, ताकि एयरपोर्ट फिर से वीरान न पड़े और मालवा क्षेत्र के यात्रियों को बार-बार हवाई सेवा बंद होने का झटका न सहना पड़े।
