जागरण संवाददाता, बठिडा

बठिडा में हुई भारी बारिश से हुए जलभराव से प्रभावित लोगों की समस्या पर ध्यान कम है जबकि राजनीति पर पूरा जोर लगाया जा रहा है। जलभराव के मुद्दे को लेकर अकाली कांग्रेसी आमने सामने हो गए हैं। हालात यह बन गए हैं कि पानी पर ही सियासत होने लगी हैं। दोनों ही पार्टियों के नेता लोगों को समस्या से निजात दिलाने पर जोर कम लगा रहे हैं जबकि राजनीति पर दिलजान से जोर लगाया जा रहा है। दोनों ही पार्टियों के नेता एक दूसरे पर शहर से पानी की निकासी न होने के आरोप लगा रहे हैं। इसके चलते बठिडा प्रेस क्लब में दोनों ही पार्टियों के नेताओं द्वारा दोपहर बाद प्रेसवार्ता की गई। इसमें अकाली दल के पूर्व विधायक सरूप चंद सिगला ने माना कि उनके फेलियर के कारण ही लोगों ने रिजेक्ट किया है। मगर अब कांग्रेस सरकार को भी ढ़ाई साल हो गए हैं, वह बता दें कि उसने शहर के लिए क्या किया है। जिन्होंने कहा कि पंजाब के वित्तमंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने बठिडा के लिए अलग से चुनाव मेनिफेस्टो तैयार किया था, जिसका पहला प्वाइंट ही यह था कि वह सबसे पहला काम बठिडा से पानी की निकासी का करेंगे। लेकिन आज तक इसका कोई हल नहीं हुआ। यहां तक कि कांग्रेस ने तो उनकी बनाई योजनाओं को भी रद्द कर दिया है।

उन्होंने बताया कि हुडको से 105 करोड़ का लोन भी पास हुआ है। मगर वह तब मिलेगा जब पंजाब सरकार अपने हिस्से का 110 करोड़ रुपए देगी। लेकिन अभी तक सरकार ने कोई पैसा नहीं दिया, जिस कारण शहर के विकास में भी रुकावट आ रही है। उन्होंने कहा कि मनप्रीत बादल की बात करने की शैली इस प्रकार की है कि वह झूठ को भी सच बोलते हैं। वह बारिश के पानी की निकासी न होने के पीछे सरकार को दोष देने की बजाए पूरा दोषी निगम को बता रहे हैं। जबकि निगम के पास इतना फंड नहीं होता कि वह शहर की इन समस्याओं का हल कर सकें। यहीं नहीं मनप्रीत बादल ने कहा कि शहर से पानी की निकासी के लिए मोटरों की जरूरत नहीं पड़ेगी, लेकिन आज उनकी यह बात कहीं दिखाई नहीं दे रही है और आज तक ढ़ाई साल में इन समस्याओं को लेकर कोई मीटिग भी नहीं की गई।

उन्होंने कहा कि अकाली सरकार के समय अगर थोड़ी बारिश होती थी तो ढ़ाई तीन घंटे और ज्यादा बारिश होने पर 12 घंटों में पानी की निकासी हो जाती थी, लेकिन अब हालात यह हैं कि लोगों को बैठने के लिए भी जगह नहीं मिल रही है। उनको अपने घरों में पानी में बैठने की बजाए छत्तों पर बैठने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। वहीं सरकार ने 4 किलोमीटर स्लज कैरियर की लाइन भी नहीं डाली। उन्होंने मनप्रीत से सवाल किया कि शहर से पानी निकासी की जिम्मेवारी किसकी बनती है, इसका जवाब लेकर हल किया जाए। उधर कांग्रेस पार्टी के जिला प्रधान अरुण वधान,पार्षद जगरुप गिल व केके अग्रवाल ने पत्रकारों के रूबरू होते हुए कहा कि निगम हर बार कहता है कि उनको वित्त मंत्री ने कुछ भी नहीं दिया जबकि उनके पास तो एमपीलैड में से ही 43.46 लाख रुपये बकाया पड़े हैं।उनको इस्तेमाल ही नहीं किया गया। आज तक इन फंडों का इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया। उन्होंने दावा कियावित्त मंत्री ने सीवरेज की सफाई के लिए 16 जुलाई 2018 को 75 लाख रुपये,नई मोटरें लगवाने के लिए 5 अक्टूबर 2018 को 50 लाख रुपये व संजय नगर डीएवी कॉलेज,संगूआणा बस्ती के छप्पडों के सौंदर्यीयकरण के लिए 56 लाख रुपये की ग्रांट जारी की गई है।

उन्होंने कहा कि नगर निगम फंड न होने का रोना रो रहा है जबकि निगम के पास इस समय करीब 40 करोड़ रुपये पड़े हैं। इनको खर्च नहीं किया जा रहा। उन्होंने आगे त्रिवेणी कंपनी के मामले में कहा कि त्रिवेणी को 184 करोड़ रुपये की बजाए 211 करोड़ रुपये में यानि के 14.99 फीसद ज्यादा राशि देकर ठेका दिया गया। अकाली सरकार के विनाशकारी सोच के कारण 30 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ निगम पर डाला गया। त्रिवेणी कंपनी ने 17 दिसंबर 2017 को काम मुकम्मल करना था लेकिन तब तक उन्होंने सिर्फ 15-20 फीसद काम ही किया।

हमने अकालियों से

ज्यादा डाली राइजिग मेन

कांग्रेसी नेताओं ने आरोप लगाया कि अकालियों द्धारा गलत आरोप लगाए जा रहे हैं कि उन्होंने 4 किलोमीटर राइजिग मेन बनाई जबकि अकाली सरकार के समय सिर्फ 2 किलोमीटर ही राइजिग मेन डाली गई। हमने 2.82 किलोमीटर राइजिग मेन डाली है। जगरूप गिल ने कहा कि मैंने निगम के मेयर को एक लिखित पत्र सौंप कर 6 घंटों में निगम की इमरजेंसी मीटिग कॉल करने को कहा है। एक रिव्यू कमेटी बनाई जाए जो शहर में हुए नुकसान का सर्वे करे।

Posted By: Jagran

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