जागरण संवाददाता, बठिडा : पंजाब खेतीबाड़ी यूनिवर्सिटी द्वारा डबवाली रोड पर क्षेत्रीय खोज केंद्र में किसान मेला लगाया जिसमें भारी गिनती में किसानों ने शमूलियत की। इसके चलते खेतीबाड़ी विभाग के प्रबंध नाकाफी दिखे। मेले के दौरान डबवाली रोड पर ट्रैफिक इतना ज्यादा हो गया कि वाहनों का निकलना मुश्किल हो गया। इस कारण दो मिनट के रास्ते को तय करने में आधा घंटे का समय लगा। जबकि यातायात को कंट्रोल करने के लिए सिर्फ एक ही ट्रैफिक पुलिस का मुलाजिम तैनात था, वह भी रोड पर न होकर मेले के गेट पर। वहीं मेले में प्रबंधों की कमी रहने के कारण जब मुख्य मेहमान वाइस चांसलर डॉ. बलदेव सिंह ढिल्लों भाषण देने लगे तो उन्होंने प्रबंधकों से दो टूक में कहा कि मेले में इतने ज्यादा किसान आ गए हैं कि आपके प्रबंध भी कम रह गए हैं। जबकि इनके लिए पंखे तो ज्यादा लगवा देने चाहिए थे मगर इतनी भीड़ लुधियाना के बाद बठिडा में देखी गई है। गौर हो कि किसान मेले में हर साल किसान कम आते थे जिसे देखते हुए इस बार भी प्रबंधकों को उम्मीद थी कि मेले में ज्यादा भीड़ नहीं होगी लेकिन इस बार किसानों को हजूम उमड़ पड़ा। प्रबंधकों ने भी माना कि पिछली बार कुर्सियां खाली रह गई थी जिस कारण यह कमी रही। मेले के दौरान वाइस चांसलर डॉ. ढिल्लों को किसानों ने शिकायत की कि विभाग के अधिकारी पराली की संभाल के लिए अन्य मशीनरी खरीदने की बजाय हैप्पी सीडर लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं। गांव घुद्दा के किसानों ने बताया कि हैप्पी सीडर की जगह उनको रोटावेटर की ज्यादा जरूरत है मगर विभाग का एक अधिकारी हैप्पी सीडर खरीदने के लिए मजबूर कर रहा है। इससे पहले खरीदे हैप्पी सीडर कबाड़ में बेचे हैं। जबकि पराली की संभाल के लिए जिस मशीनरी की जरूरत है, किसानों को वही दी जाए, न कि अन्य मशीनरी। वहीं किसानों ने विभाग के अधिकारियों पर सब्सिडी रोकने के भी आरोप लगाए जिस पर वाइस चांसलर डॉ. ढिल्लों ने किसानों को विश्वास दिलाया कि हर समस्या का हल किया जाएगा।

पानी के स्तर व पराली जलाने पर जताई चिंता

वीसी ने बताया कि मेले का स्लोगन पवन गुरु पानी पिता माता धरत महत रखा है। जबकि पराली जलाने के कारण वातावरण इतना प्रदूषित हो गया है कि लोग बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं और पानी लगातार नीचे जा रहा है। उन्होंने केंद्र के ग्राउंड वाटर द्वारा दी रिपोर्ट पर कहा कि अगर पानी का दुरुपयोग न रोका तो 25 साल में पानी खत्म हो जाएगा। किसानों को पराली न जलाने की अपील करते हुए बताया कि 16 फीसद पराली की संभाल से वह अब 57 फीसद पर पहुंच गए हैं। खेती माहिरों को कहा कि पराली न जलाने से जागरूक करते समय किसानों के साथ सेहत विभाग के आंकड़े भी शेयर करें, ताकि उनको पता चल पाए कि इसके क्या नुकसान हैं।

बासमती धान में खाद डालने के बताए दुष्प्रभाव

मेले में माहिर डिप्टी डायरेक्टर पसार जसकरण सिंह, डॉ. जगजीत कौर, डॉ. दीदार सिंह भट्टी, डॉ. परमजीत सिंह, डॉ. जितेंद्र सिंह बराड़ ने किसानों को फसलों संबंधी जानकारी देते बताया कि बासमती धान में कोई खाद या कीटनाशक ना डालें, क्योंकि यह बासमती की गुणवत्ता पर असर डालता है। जबकि हरियाणा के खेती माहिर डॉ. रिषीपाल ने इस बार नरमे की भरपूर फसल होने का दावा किया। मेले में शामिल किसानों ने बीज खरीदने के अलावा खेतीबाड़ी विभाग व प्राइवेट फर्मो द्वारा लगाए ओजारों की प्रदर्शनियों पर भी जानकारी हासिल की।

Posted By: Jagran

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