जासं,बठिडा: कोरोना की दूसरी लहर में ब्लैक फंगस (काली फफूंद) ने भी बठिडा जिले में एंट्री कर ली है। जिले का रहने वाला एक मरीज ब्लैक फंगस की चपेट में आ गया, जोकि मौजूदा समय में लुधियाना के एक निजी अस्पताल में इलाज करवा रहा है। हालांकि, बठिडा के पहले मरीज की जानकारी स्थानीय सेहत विभाग के अधिकारियों के पास नहीं है, लेकिन उनका कहना है कि अगर बठिडा जिले से संबंधित कोई मरीज दूसरे जिले में है, तो उसकी पूरी जानकारी हासिल कर पता किया जाएगा कि वह कब इस बीमारी की चपेट में आया था। डाक्टरों अनुसार इस बीमारी का खतरा कोरोना संक्रमित उन मरीजों को ज्यादा है, जिनको शुगर है और स्टेरायड दिया गया है।

दरअसल, कोरोना महामारी में ब्लैक फंगस के मामले काफी बढ़ गए हैं। ज्यादातर उन लोगों को यह शिकायत हो रही है, जिनको शुगर है और कोरोना संक्रमण से स्वस्थ हो चुके हैं। स्टेरायड लेने वाले गंभीर कोरोना मरीज को इसका ज्यादा खतरा रहता है। ज्यादातर 45 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्ति को ब्लैक फंगस हो रहा है। कमजोर इम्युनिटी वाले मरीजों, ज्यादा शुगर या शराब का सेवन करने वालों लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं। अगर इलाज या पहचान समय पर न हो तो मरीज की पूरी आंख ही निकालनी पड़ती है। वहीं, देरी से पता चलने पर मरीज की जान तक जा सकती है। नाक से आंख और दिमाग की तरफ बढ़ती है फंगस

मरीज की शुगर ज्यादा अनियंत्रित हो या जो मरीज ज्यादा स्टेरायड पर निर्भर हों उनके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। ऐसे में यह फंगस साइनस(नाक) से शुरू हो चेहरे के टिश्यू को ढंकते हुए आंखों के पीछे फिर दिमाग तक चली जाती है। जल्द पता चले तो दवाइयों से ठीक हो सकते हैं। न पता चले तो कुछ दिन में ही फैलते हुए आंखों की रोशनी छीन लेती है और दिमाग की तरफ बढ़ती है।