गुरप्रेम लहरी, ब¨ठडा : भले ही पंजाब सरकार शिक्षा का स्तर ऊंचा उठाने के लाख दावे कर रही है, लेकिन हालात यह हैं कि पंजाब के कॉलेजों में प्रोफेसरों के सिर्फ 27 फीसद पद ही भरे हुए हैं जबकि 73 फीसद पद रिक्त पड़े हैं। इस कारण छात्रों की पढ़ाई का भारी नुकसान हो रहा है। लेकिन सरकार इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रही।

48 कॉलेजों में 1366 पद रिक्त

पंजाब में कुल 48 सरकारी कॉलेज हैं। इनके लिए कुल 1873 पद हैं, जबकि सिर्फ 507 पदों पर ही प्रोफेसर तैनात हैं और 1366 पद रिक्त पड़े हुए हैं। इसके अलावा 253 पदों पर पार्ट टाइम अध्यापक रखे हुए हैं। क्षेत्र के लोग इसके लिए कई बार प्रशासन से गुहार लगा चुके हैं। लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। प्रदेश में जितने भी सरकारी कॉलेज हैं, उन सभी में स्टाफ की कमी है। सरकारी कॉलेजों में लोकल व्यवस्था में अध्यापक रखे हुए हैं, जो स्टूडेंट्स को पढ़ा रहे हैं।

भर्ती न होने के कारण ये हो रहा नुकसान

रेगुलर अध्यापकों की भर्ती न होने के कारण कॉलेजों की ओर से स्थानीय स्तर पर गेस्ट फैकल्टी आदि अध्यापकों को रखा जा रहा है। इससे छात्रों का नुकसान हो रहा है। क्योंकि इन अध्यापकों को दिया जाने वाला वेतन सरकार से लेने की जगह पीटीए फंड से दिया जा रहा है। इसके खिलाफ छात्र संगठन कई बार संघर्ष भी कर चुका है।

अदालत में डालेंगे पीआइएल

पंजाब कॉलेज टीचर एसोसिएशन के प्रधान प्रो. बर¨जदर ¨सह टोहड़ा ने कहा कि वह प्रोफेसरों की कमी के मामले को काफी बार सरकार के ध्यान में ला चुके हैं लेकिन आज तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे बच्चों की पढ़ाई का नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि अगर इन रिक्त पदों को तुरंत न भरा गया तो वे अदालत में पीआइएल डालेंगे।

Posted By: Jagran