जासं,बठिडा: आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जनआरोग्य योजना पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) पंजाब ने सवाल उठाए हैं। एसोसिएशन के मुताबिक एसबीआइ जरनल इंश्योरेंस कंपनी व पंजाब सरकार की नीतियों के चलते अधिकतर अस्पताल इस पैनल से बाहर हो रहे हैं। अस्पतालों को मरीज के इलाज के 40 दिन बाद भी भुगतान नहीं मिल रहा।

आइएमए के प्रदेश उपप्रधान व बठिडा ईकाई के जिला प्रधान डा. विकास छाबड़ा ने बताया कि बीमा योजना में व्याप्त खामियों को लेकर राज्य भर के 300 के करीब डाक्टरों की बैठक गत रविवार को लुधियाना में हुई। बैठक में निजी अस्पतालों को इस योजना को लेकर आ रही समस्याओं को लेकर विचार चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत से जुड़े अधिकारी इसे अनोखी योजना बताते रहे हैं और कहते हैं कि चीन में भी ऐसी स्वास्थ्य योजना नहीं है, जबकि वहां का स्वास्थ्य बजट भारत की तुलना में करीब पांच गुना अधिक है। उन्होंने स्वास्थ्य बजट बढ़ाने की मांग की।

उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत तीन दर्जन विभागों से संबंधित बीमारियों का इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि एलोपैथी में इससे कहीं ज्यादा विभाग हैं। इसके अलावा 1393 तरह की बीमारियों के इलाज के लिए पैकेज निर्धारित हैं। इसमें 194 पैकेज ऐसे हैं जोकि सरकारी अस्पतालों में निश्शुल्क उपचार के साथ जुड़े हैं। फिलहाल उन मरीजों का क्या होगा, जिन्हें पैकेज में शामिल बीमारियों से अलग बीमारी है। एसोसिएशन के महसचिव डा. आरवी अशोक ने कहा कि इस योजना में सरकारी अस्पतालों को भी शामिल किया गया है, जिनमें पहले से ही निश्शुल्क इलाज होता है। ऐसे में उन्हें जोड़कर बीमा कंपनियों को फायदा पहुंचाया जा रहा है। एसबीआइ जरनल इंश्योरेंस ने पिछले कुछ समय से अस्पतालों को मानसिक तौर पर परेशान करने के लिए विभिन्न तरह के नए नियम तैयार कर लिए हैं। इसमें मरीजों को दो से तीन दिन उपचार शुरू करवाने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं 15 दिन में क्लेम सेटल करने की हिदायत के विपरित 40 दिन तक क्लेम नहीं दिया जा रहा है।

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