संस, बठिडा: जैन स्थानक कपड़ा मार्केट के प्रवचन हाल में जैन संत पूज्य डा.राजेंद्र मुनि ने गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष्य में आयोजित प्रवचन माला में जीवन में गुरु को नींव की भांति बतलाया। उन्होंने कहा कि बिना नींव के भव्य बहुमंजला ईमारतें आंधी-तूफान में धराशाई हो जाती हैं। हमारा जीवन रूपी महल भी गुरु रूपी नींव के अभाव में डांवाडोल हो जाता है। गुरु अज्ञान अंधकार को नष्ट कर हमें ज्ञान का प्रकाश प्रदान करता है। बिना गुरु जीवन अंधेरे में भटकता रहता है। गुरु उस बिजली घर की तरह है जहां से सर्वत्र बिजली का संचार होता है एवं दुनिया जगमगाती रहती है। गुरु ही हमारे जीवन में उजाला लाता है।

डा.राजेंद्र मुनि ने कहा कि प्राचीन परंपरा गुरुकुल, गुरु मंदिर, गुरुधाम की रही है, जहां जाकर जीवन का निर्माण होता है। गुरु परंपरा का अभाव होता जा रहा है। परिणाम मानव का चित अशांत तनाव व भारी पन को प्राप्त होता है। गुरु के आशीर्वाद में वह शक्ति साम‌र्थ्य है जो डूबते हुए जीवन जहाज को तार देती है। गुरु किस्ती पारकर किनारे पर ला देता है। गुरु हमें संसार सागर से पार करा मोक्ष का पद प्रदान कर देता है। आज आवश्यकता है कि गुरु पद पर हमेशा दृढ़ विश्वास करने की, जितना विश्वास डाक्टर, वकील, मास्टर, दुकानदार आदि पर रखता है उससे ज्यादा विश्वास हमारा गुरु पर होना चाहिए। गुरु मार्ग का दाता है। भटकते हुए पंथी की सही जीवन जीने का मार्ग प्रदान करता है। गुरु उस औषधि की भांति है जिसके वचन श्रवण व धारण करने से जीवन स्वस्थ रहता है।

सभा में साहित्यकार सुरेंद्र मुनि ने गुरु स्तवन के माध्यम से सभी को गुरु पद का महत्व समझाया एवं प्रश्नों का उत्तर प्रदान कर प्रतियोगिता प्रारंभ करने की महिला मंडल को प्रेरणा दी। चातुर्मास में अधिक से अधिक सत्संग व दान पुण्य के शुभ आयोजन की सूचना महामंत्री उमेश जैन द्वारा प्रदान की गई।

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