साहिल गर्ग, बठिडा : पंजाब सरकार की कर्ज माफी मुहिम में आज भी अधिकांश किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। इन हालातों में किसान कर्ज माफी का इंतजार करते-करते बैंकों के डिफाल्टर हो रहे हैं। वहीं बैंक इन किसानों से रिकवरी करवाने के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई करने का प्लान बना रहे हैं। लेकिन किसानों द्वारा फरियाद लगाने के बाद भी उनका कर्ज माफी की लिस्ट में नाम नहीं आया। हालात यह है कि केंद्रीय सहकारी बैंकों ने डिफाल्टर किसानों के खिलाफ सख्ती शुरू कर दी है। बठिडा में ही 1500 के करीब किसानों ने बैंकों के केसों की तैयारी भी कर ली है। जबकि बठिडा जिले में ही 5000 के करीब किसानों की तरफ बैंकों का पैसा फंसा हुआ है तो फरीदकोट जिले में 2600 के करीब ऐसे किसान हैं, जो कर्ज वापस न कर पाने के कारण बैंकों के डिफाल्टर हो गए हैं। बठिडा जिले के केंद्रीय सहकारी बैंक ने 1047 ऐसे किसानों की पहचान की है, जो डिफाल्टर हो गए हैं। इनमें खेती लिमिट वाले 675 किसान हैं, जिन पर 22.97 करोड़ रुपए का कर्जा है।

सहकारी बैंक के एमडी ने सभी बैंकों को एनपीए में बढ़ोतरी न होने देने की बात कही है। वहीं दूसरी तरफ भारतीय किसान यूनियन उगराहां के राज्य सचिव शिगारा सिंह मान ने बताया कि बैंक डिफाल्टर घोषित किए गए किसानों की जमीनों को निलाम करने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बेशक कर्ज माफी का ढिढोरा पीट रही है। लेकिन असल में जो किसान इसका हकदार हैं, उसको अभी तक कोई फायदा नहीं मिला। किसानों को आ रहे नोटिस

सहकारी बैंक के पथराला ब्रांच के सबसे अधिक 133 किसान डिफाल्टर हो गए हैं, जिन पर 6.05 करोड़ रुपये का कर्ज है। कर्ज माफी के इंतजार ने किसानों को डिफाल्टर बना दिया है। गांव चक्क फतेह सिंह वाला के एक किसान की जमीन भी अटैच कर जमाबंदी में लाल एंट्री के लिए डाल दी। जबकि गांव गहरी बुट्टर के एक किसान को नोटिस भेजा गया है तो गांव बांधी के किसान ने कर्ज माफी के इंतजार में किश्तें नहीं भरी। जिसको अब बैंकों के नोटिस आ रहे हैं। बैंक द्वारा हर जिले में 50 बड़े डिफाल्टर किसानों की सूचियों को तैयार किया गया है। जबकि बठिडा जिले में 17 सहकारी बैंक की ब्रांचों का एनपीए सबसे ज्यादा है।

यहीं नहीं गांव जेठूके के किसान मेहरजीत सिंह पर तो गिरफ्तारी की तलवार लटकने लगी है। उसका गिरफ्तारी वारंट भी जारी कर दिया गया है। किसान ने सहकारी बैंक से करीब 12 लाख रुपये का कर्ज लिया था। उसके बाद विदेश जाने के लिए जमीन गहने रख दी। मगर एजेंट पैसे लेकर फरार हो गया। इस कारण किसान परेशान है। बैंक द्वारा किसान को नोटिस भेजे जा रहे हैं कि अगर उसने किश्त न भरी तो जमीन को निलाम करने के लिए केस तैयार किया जाएगा। ऐसे वापस करना पड़ता है कर्ज का पैसा

खेती लिमिट के तहत तीन लाख से ज्यादा के कर्ज पर 12 फीसद ब्याज देना पड़ता है। जब किसानों ने कर्ज माफी की आस में यह पैसा नहीं भरा तो उनको डिफाल्टर ऐलान कर दिया गया। डिफाल्टर ऐलान किए जाने के बाद ब्याज दर 15 फीसद हो जाती हैं। इसके अलावा हर 6 महीने बाद ब्याज मूल कर्ज में जुड़ना शुरू हो जाता है। किसानों को ब्याज ने इस तरह से जकड़ा हुआ है कि चिंता के कारण चाओके बैंक ब्रांच के करीब 11 डिफाल्टर किसानों की मौत तक हो गई। यही नहीं इसके बाद यह बोझ अब उनके परिवारिक मेंबरों को उठाना पड़ रहा है। वहीं फूल इलाके में 40 डिफाल्टर ऐसे हैं, जिनके सिर पर 2.19 करोड़ रुपए का कर्ज है।

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