जागरण संवाददाता, बठिडा

बठिडा से चलने वाली बसों के लिए 24 दिसंबर को लागू किए गए टाइम टेबल को लेकर पैदा हुए विवाद पर आज फैसला होगा। इस संबंध में आरटीए की ओर से मीटिग की जाएगी। इसमें अगर कोई हल न निकला तो पीआरटीसी की यूनियनों ने पूरे पंजाब के डिपो बंद करने की चेतावनी दी है। जबकि नया टाइम टेबल रद्द करने के विरोध में शुक्रवार को पीआरटीसी की यूनियनों ने शहर के सभी चौक चार घंटे के लिए बंद कर दिए थे। जिसके बाद डीसी की अगुआई में हुई मीटिग में सोमवार तक इसका हल करने का समय लिया गया था।

असल में चुनाव आचार संहिता लगने से पहले 24 दिसंबर 2021 को बसों को नए सिरे से बनाए गए टाइम टेबल के अनुसार चलाया गया। मगर कुछ निजी बस आपरेटरों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के आधार पर कोर्ट में कंटेंपट फाइल कर दी। जिसके चलते आरटीए सचिव ने 17 जनवरी को 24 दिसंबर को बनाए गए टाइम को रद्द कर पुराने टाइम टेबल पर ही बसों को चलाने के आदेश जारी किए। मगर पीआरटीसी की बठिडा डिपो की यूनियनों को यह रास नहीं आया तो उनके द्वारा वीरवार को आरटीए सचिव को पत्र भी दिया गया था। लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो सभी यूनियनों ने एकजुट होकर शुक्रवार को बस स्टैंड के अलावा पूरा शहर बंद कर दिया था। जिसके बाद धरना समाप्त करवाने के लिए दो दिन का समय लिया गया था।

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ऐसे बनाया गया था नया टाइम टेबल

बठिडा डिपो से चलने वाली सरकारी व प्राइवेट बसों के समय में पहले काफी अंतर था। इसके तहत सरकारी बस को काउंटर पर 8 मिनट का समय मिलता था तो प्राइवेट बस को 15 मिनट का समय मिलता था। लेकिन नए टाइम के अनुसार सभी बसों को बराबर का समय दिया गया। इसको 24 दिसंबर को बनाकर लागू किया गया। मगर निजी बसों की कंटेंपट के बाद रद्द किया तो हंगामा हुआ।

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पीआरटीसी भी है डिफाल्टर

आरटीए सचिव बलविदर सिंह के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के 2016 के आदेशों के अनुसार नए टाइम टेबल में कोई भी ऐसी ट्रांसपोर्ट को शामिल नहीं किया जा सकता, जो टैक्स डिफाल्टर हो या फिर एक परमिट पर दो बसें हों। लेकिन जब नया टाइम टेबल बनाया गया तो निजी ट्रांसपोर्टरों ने कंटेंपट दायर कर बताया कि पीआरटीसी भी 268 करोड़ रुपये की टैक्स डिफाल्टर है। जबकि निजी बसों का टैक्स किश्तों में किया गया है। इसके आधार पर नया टाइम टेबल रद्द किया गया। इसमें आरटीसी सचिव के अलावा एसटीसी पंजाब व प्रिसिपल ट्रांसपोर्ट विभाग को भी पार्टी बनाया गया है।

Edited By: Jagran