संस, बठिडा

आशा वर्करों द्वारा अपनी मांगों संबंधी डीसी को मांगपत्र दिया गया। इस दौरान आशा वर्करों ने कहा कि कोरोना काल में उनका कार्य काफी बढ़ गया है, वहीं दूसरी तरफ वेतन हमें उतना ही दिया जा रहा है। आशा वर्कर कोरोना मरीजों के घरों में किट देकर आती हैं। घरों में जाकर लोगों का तापमान व आक्सीजन चेक करनी पड़ती है। ये कार्यों के आशा वर्कर से अपनी जान जोखिम में डालकर करती हैं। इसके बावजूद आशा वर्करों को कम वेतन दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि अगर कोई आशा वर्कर कोरोना पाजिटिव पाई जाती है, तो उसको कम से एक लाख रुपए तक का मुआवजा दें। वेतन 2500 रुपए से बढ़ाकर 15 हजार रुपए किया जाए। टाइम पर बनता वेतन दिया जाए। वर्दी भत्ता दिया जाए। जनवरी से रुका मानदेय तुरंत जारी की जाए।