रोहित जिंदल, बठिंडा

गुमनामी के अंधेरे से खो चुके पंजाबी एक्टर सतीश कौल अब उन मां-बाप की आवाज बनने जा रहे हैं, जिनके बच्चों ने उन्हें अनदेखा कर घर से निकाल दिया हो। खुद कई साल वृद्ध आश्रम में रहने वाले सतीश कौल का कहना है कि वह नहीं चाहते कि जो नर्क उन्होंने देखा है, कोई मां-बाप देखे। अपनी इस आवाज को बुलंद करने के लिए सतीश कौल मंगलवार को बठिंडा आए थे।

सतीश कौल ने कहा कि किसी जमाने पंजाब का सुपर स्टार रहने वाले 'सतीश कौल' के पास आज कोई पैसा नहीं है, लेकिन वह वादा करते हैं छोटा-बहुत रोल करके जो भी पैसा उनके पास आएगा वह बेसहारा बुजुर्गो पर ही खर्च करेंगे।

सतीश ने कहा कि एक समय था जब उनके पास करोड़ों रुपये थे और एक समय वह भी था जब बिस्कुट के लिए उन्होंने भीख तक मांगी। कौल ने कहा कि वृद्ध आश्रम में रहने का गम क्या है, उनसे बेहतर कोई नहीं जान सकता। वह जानते हैं कि किस तरह से वृद्ध आश्रम में उन्होंने लोगों के ताने सुने, वो तो भला हो कुछेक लोगों का जिन्होंने उन्हें इस गुमनामी के अंधेरे से बाहर आने का मौका दिया और उन्हें कुछ कर दिखाने को कहा।

सतीश कौल ने बताया कि वह अपने दर्द को लोगों के साथ शेयर करना चाहते हैं, वह बताना चाहते हैं कि जो बच्चे मां-बाप को ठुकरा देते हैं, उन मां-बाप की जिंदगी किस तरह नर्क में गुजरती है। वह अपने जीवन पर 'सतीश कौल का सफरनामा' नामक किताब लिख रहे हैं, किताब में वह अपने जीवन के उन पलों को लोगों के साथ शेयर करेंगे, जिसे पढ़ने के बाद हर किसी की आंख में पानी आ जाएगा। किताब के जरिये वह लोगों को बताएंगे दिन में छह बार कपड़े बदलने वाले सतीश पर ऐसा वक्त भी आया कि कई-कई दिन तक रोटी तक नसीब नहीं हुई। बुजुर्गो के लिए उठाए इस कदम के संबंध में कौल का कहना है कि यह मुहिम वह देश स्तर पर चलाई जाएगी, जिसकी शुरुआत उन्होंने बठिंडा से की है।

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अमिताभ से ली सीख

सतीश कौल ने बताया कि कई बार जब वह भिखारी की तरह लाइन में लगकर रोटी व बिस्कुट मांगते तो लोग कहते इसकी शक्ल सतीश कौल से मिलती है और मैं सिर चुका हाथ फैला देता। अमिताभ बच्चन से लेकर शाहरुख खान व गोबिंदा तक ने उन्हें सहारा देने को कहा, लेकिन अपने बलबूते फिर से खड़ा होने की चाह के चलते उन्होंने जिंदगी की लड़ाई खुद ही लड़ी और लड़ रहे हैं। इसकी सीख उन्होंने मैगास्टार अमिताभ बच्चन से ली है।

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