हेमंत राजू, बरनाला :

जिला बरनाला में करीब एक हजार बेसहारा पशु सड़कों पर घूम रहे हैं। इससे जहां आए दिन हादसे होते रहते हैं वहीं अन्य कई तरह की परेशानी का सामना लोगों को करना पड़ता है।

जबकि सरकार गो कर के नाम जनता से वसूली कर रही है, फिर भी गोवंश की संभाल नहीं हो पा रही है, जिसका खामियाजा लावारिस पशुओं से सड़कों पर हो रहे हादसों में जान गवाना पड़ रहा है।

शहर में इन सड़कों पर होते हैं अधिक हादसे

हंडिआया बाईपास, नानकसर रोड, धनौला रोड, बरनाला बाजाखाना रोड, सेखा कैंचियां, बरनाला संघेड़ा चौक, संघेड़ा रोड, कचेहरी चौक, सदर बाजार, फरवाही बाजार, पुराना बाजार, किला मोहल्ला में बेसहारा पशुओं की भरमार है, जिस कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

डीसी बरनाला तेज प्रताप सिंह फूलका ने बताया कि जिला प्रशासन लोगों के सहयोग के साथ मनाल गौशाला को अच्छे तरीके से चलाने की संभव कोशिश की जा रही है। शहर में हर धार्मिक समाजिक संगठनों से सहयोग लेकर समाजसेवी लोगों को गौशाला से जोड़ने के प्रयत्न किए जा रहे है।

नौ माह में 16 की मौत

एक जनवरी से 30 अक्टूबर 2019 तक जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बेसहारा पशुओं से टकराने के कारण कुल 16 सड़क हादसे हो चुके है, जिनमें 16 लोगों की मौत हो चुकी है व 32 के करीब लोग घायल हो चुके हैं। संभालने की जिम्मेदारी सरकारी की : अनिल

श्री राधे कृष्ण गोधाम के प्रधान अनिल बांसल नाणा ने कहा कि सरकार गो कर वसूलती है तो गोवंश अथवा बेसहारा पशुओं को संभालना भी चाहिए, ताकि सड़क हादसे होने से बचे। सरकार ने एनजीओ का साथ : भारत भूषण

गो सेवक भारत भूषण ने कहा कि जिला प्रशासन को बेसहारा पशुओं की संभाल के लिए एनजीओ को साथ लेकर व गांव के सरपंचों व किसान भाईयों के साथ एक ग्रुप बना कर इन्हें सरकारी गोशालाओं में रखने के लिए एनजीओ के प्रबंधकों को बागडोर सौंप देनी चाहिए, ताकि बेसहारा पशु गौशालाओं में रहे व उन्हें हरा चारा, दाना भी मिलता रहे। कौंसिल संभाले अपनी जिम्मेदारी : सुशील

पंजाब गो पुत्र सेना के प्रधान सुशील भारती ने कहा कि जब नगर कौंसिल की देख-रेख में सरकारी गोशाला का प्रबंधन चलता है तो जिम्मेवारी भी नगर कौंसिल की बनती है कि बेसहारा पशुओं की संभाल हो। प्रशासन पशुओं को लगाए टैग की जांच करे : गोयल

अपाहिज हो गोसेवा आश्रम के प्रधान एडवोकेट प्रदीप गोयल ने कहा कि बेशक जिला प्रशासन ने सड़कों पर घूमते बेसहारा पशुओं को टैग लगा कर विभिन्न गोशालाओं में छोड़ दिया है, परंतु जिला प्रशासन को समय-समय पर सड़कों पर घूमने वाले इन बेसहारा पशुओं के टैग की जांच भी करवानी चाहिए।

Posted By: Jagran

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