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बरनाला में धनौला सिविल अस्पताल में इलाज के अभाव में महिला की मौत का आरोप, परिजनों ने शव रखकर लगाया जाम

Published: Mon, 20 Jul 2026 02:46 PM (IST)

धनौला सिविल अस्पताल में इलाज न मिलने से एक महिला की मौत के आरोप के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने शव रखकर सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किया।

धनौला सिविल अस्पताल में इलाज के अभाव में महिला की मौत का आरोप (फोटो: जागरण)

धनौला सिविल अस्पताल में इलाज के अभाव में महिला की मौत का आरोप (फोटो: जागरण)

हेमंत राजू, धनौला/बरनाला। धनौला के सिविल अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मृतक महिला के स्वजनों और स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि अस्पताल में समय पर डाक्टर उपलब्ध नही होने और इलाज में देरी के कारण एक महिला की मौत हो गई।

घटना के बाद गुस्साए स्वजनों और शहरवासियों ने महिला का शव अस्पताल के बाहर रखकर धरना दिया और सड़क जाम कर दी। मिली जानकारी के अनुसार, करमजीत कौर, पत्नी बिक्कर सिंह, की रविवार देर शाम अचानक तबीयत बिगड़ गई।

स्वजनों उन्हें तुरंत इलाज के लिए सिविल अस्पताल धनौला लेकर पहुंचे, लेकिन उनका आरोप है कि उस समय अस्पताल में कोई डाक्टर मौजूद नहीं था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ द्वारा समय पर आवश्यक उपचार नहीं दिया गया, जिसके चलते महिला की मौत हो गई।

घटना के बाद नगर कौंसिल के पूर्व उपाध्यक्ष व जिला बरनाला हलवाई यूनियन के अध्यक्ष सुखविंदर सिंह मुंदरी के नेतृत्व में स्वजनों और बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने अस्पताल के बाहर धरना शुरू कर दिया। बाद में बस स्टैंड के सामने महिला का शव रखकर सड़क जाम कर दी गई।

सुखविंदर सिंह मुंदरी ने कहा कि करोड़ों रुपये की लागत से बने इस अस्पताल पर धनौला शहर सहित आसपास के करीब 28 गांवों की आबादी निर्भर है, लेकिन लंबे समय से डाक्टरों और मेडिकल स्टाफ की भारी कमी बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि कई महीनों से सरकार से डाक्टरों की नियुक्ति की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अस्पताल में डॉक्टरों की कमी जल्द पूरी नहीं की गई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

मृतका के पुत्र गुरप्रीत सिंह ने आरोप लगाया कि यदि उनकी मां को समय पर इलाज मिल जाता तो उनकी जान बच सकती थी। उन्होंने कहा कि दोपहर के बाद अस्पताल में डाक्टरों की उपलब्धता और भी कम हो जाती है, जिससे आपातकालीन मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि धनौला राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है, जहां आए दिन सड़क दुर्घटनाएं होती रहती हैं। ऐसे में अस्पताल में 24 घंटे डाक्टर और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होना बेहद जरूरी है। वर्तमान व्यवस्था के कारण गंभीर मरीजों को बरनाला और अन्य शहरों के अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है।

प्रदर्शनकारियों ने अस्पताल में स्थायी डाक्टरों की नियुक्ति, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता, 24 घंटे इमरजेंसी सेवाएं तथा पर्याप्त पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती की मांग की। उनका कहना है कि यदि जल्द सुधार नहीं किया गया तो बड़ा जन आंदोलन शुरू किया जाएगा।

घटना की सूचना मिलने पर थाना धनौला के एसएचओ इंस्पेक्टर लखबीर सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित किया। वहीं तहसीलदार रजनीश गोयल ने धरनास्थल पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों से मांग पत्र लिया और उसे सरकार तक पहुंचाने का भरोसा दिया।

धरने के दौरान पार्षद बूटा सिंह, साहिब सिंह सोढ़ी, शंकर बंसल, विशाल वीर, जगतार सिंह, बिल्लू खान, व्यापार मंडल अध्यक्ष रमन कुमार वर्मा, करमजीत सिंह, चमकौर सिंह गग्गी, राजिंदर कुमार, रविंद्र रामा, गगनदीप वर्मा, नरेश कुमार नेशी, सेवानिवृत्त इंस्पेक्टर धर्मपाल सहित बड़ी संख्या में शहर के गणमान्य लोग मौजूद रहे। समाचार लिखे जाने तक शव के साथ धरना और सड़क जाम जारी था।