जागरण संवाददाता, अमृतसर

खालसा कालेज मैनेजमैंट अधीन समूह शैक्षणिक संस्थाओं में सोलर ऊर्जा को जल्द लागू किया जाएगा, जिसका मकसद प्रदूषण रहित साफ-सुथरी ऊर्जा प्रदान करना है। खालसा कालेज गवर्निंग कौंसिल (केसीजीसी) के आनरेरी सचिव र¨जदर मोहन ¨सह छीना ने समूह शैक्षणिक संस्थाओं में सोलर प्लांट लगाने के लिए उचित स्थानों का जायजा लेने के बाद रविवार बताया कि इस संबंधी दिल्ली की कंपनी से ईकरारनामा मुकम्मल कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट के तहत कालेज के होस्टलों को पहल देने के अलावा कंटीनों और कक्षाओं में भी सोलर सिस्टम द्वारा बिजली का वितरण किया जाएगा। प्रोजेक्ट संबंधी पंजाब पावरकारपोरेशन से भी वार्तालाप किया गया था और सर्वेक्षण के बाद बिजली उत्पाद में 700 मेगावाट के ऊर्जा प्रोजेक्ट संस्थाओं में लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विश्व में ऊर्जा की कमी को दूर करने के लिए सोलर पावर एक लाभप्रद हल है। यह प्राकृति ऊर्जा स्रोतों में से एक है और यह वातावरण अनुकूल है। नई और निर्माणाधीन ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार, हरियाली पहल कदमी अधीन समूह देश में सोलर, ग्रीन शहरों का विकास कर रही है और बहुत सारे संगठनों व संस्थाओं ने सोलर पावर प्लांटों को स्थापित करने के लिए कदम उठाएं हैं। चूंकि सौर ऊर्जा बिजली ऊर्जा से सस्ती और किफायती है। उन्होंने कहा कि सभी प्रोजेक्ट अगले 6 महीनों से पहले की अवधि में लग कर चालू हो जाएंगे। छीना ने कहा कि अति-आधुनिक तकनीक के सोलर पैनलों का प्रयोग करने से यह ऊर्जा रिवायती बिजली भी बहुत सस्ती पड़ती है। उन्होंने कहा कि पावर कारपोरेशन से बिजली 7 रुपए प्रति यूनिट से भी ज्यादा कीमत पर मिलती है। जबकि एग्रीमेंट करके सौर ऊर्जा सिर्फ 4 रुपए प्रति यूनिट प्राप्त की जाएगी, जिससे सोसायटी को करोड़ों रूपए वार्षिक मुनाफा होगा। उन्होंने कहा कि एतिहासिक इमारतों पर सोलर पैनल लगाने का कोई असर नहीं होगा, चूंकि कंपनी ने लिखती रूप में इकरार किया है कि इमारतों को किसी किस्म का नुकसान यां हानि नहीं पहुंचाई जाएगी। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा को अपनाने से पावर कटों से निपटने में भी मदद मिलेगी, चूंकि पावर सप्लाई निर्विघ्न जारी रहेगी। विशेषज्ञों की विभिन्न बैठकों क बाद लिए गए फैसले में सोसायटी के वित्तीय सचिव गुनबीर ¨सह, प्रोजेक्ट मैनेजर एनके शर्मा और अन्यों सदस्यों ने हिस्सा लिया, जिसके बाद ही इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी दी गई है। ¨प्रसिपल डा. महल ¨सह ने कहा कि इससे होस्टलों में रह रहे विद्यार्थी, कैंटीनों और कक्षाओं में सौर ऊर्जा का प्रयोग कर सकते हैं।

Posted By: Jagran

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