कमल कोहली, अमृतसर

बीमा राशि पर जीएसटी लगाना लोगों पर आर्थिक बोझ डालने के समान है। जीएसटी से बीमा पॉलिसी महंगी हो जाती है। जोकि आम व्यक्ति की पहुंच से बाहर हो जाती है। इसलिए केंद्र सरकार को बीमा राशि पर जीएसटी हटाने का कानून शीघ्र पारित करना चाहिए। उक्त मांग नेशनल फेडरेशन आफ इंश्योरेंस फील्ड वर्कर्स ऑफ एसोसिएशन की सिफ्ती इंटनेशनल अमृतसर में चल रही दो दिवसीय बैठक के समापन दिवस पर फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनय बाबू व महासचिव विवेक सिंह ने की।

उन्होंने कहा कि बीमा सेवाओं पर जीएसटी का प्रावधान नहीं होना चाहिए। बीमा एक व्यक्ति अपनी सामाजिक सुरक्षा व आर्थिक बचत के लिए करता है पर बीमा करवाने वालों पर जीएसटी लगाना एक बोझ के समान है। बैंकों की एफडी पर किसी तरह का जीएसटी नहीं है। सरकार ने एक करोड़ तक के व्यापार पर जीएसटी योजना को दायरे से बाहर रखा है, लेकिन बीमा कम राशि करने वालों पर जीएसटी लगाना दोहरी पालिसी का परिणाम है।

जीएसटी हटाने के लिए फेडरेशन देश के सभी सांसदों को जागरूक करेगी। ताकि वह सदन में बीमा पर जीएसटी हटाने के लिए आवाज उठाएं।

केंद्र सकार को एलआइसी के ढांचे के साथ कोई भी छेड़छाड नहीं करनी चाहिए। यदि एलआइसी के साथ निजीकरण की छेड़छाड़ होती है तो उसमें देश की जीडीपी भी प्रभावित होगी। एलआइसी के 28 करोड़ पॉलिसी होल्डर है तथा तीस लाख करोड़ रुपये का व्यापार है। बीमा क्षेत्र में निजी कंपनियों के होने के बावजूद लोगो को अभी एलआइसी पर पूरा भरोसा है। सरकार को बजट में पेंशन पालिसी होल्डरों को 80 सी के अधीन लेकर आना चाहिए। इस समय पेंशन पालिसी होल्डरों को इंकम टैक्स की रिबेट नहीं मिल रही है।

बैठक में नार्थ जोन के चुनाव भी कराए गए जिसमें दो वर्षो के लिए पुरानी टीम को सर्वसम्मति से चुना गया। इसमें एमएल सोनी प्रधान, श्री कांत वशिष्ठ महासचिव, वेद प्रकाश नेगी उपाध्यक्ष, अशोक कुमार, राकेश मेहता, रुपिदरजीत सिंह संयुक्त सचिव व मनोज कुमार कैशियर बनाए गए।

इस अवसर पर रिजनल प्रधान रमन शर्मा, सचिव विकास भल्ला, सचिन कुमार, रवि कांत, गोपाल, राजीव वालिया व राकेश मल्होत्रा आदि मौजूद थे।

Posted By: Jagran

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