नितिन धीमान, अमृतसर: थैलेसीमिया से पीड़ित लोगों विशेषकर बच्चों के उपचार का दंभ भर रहा हमारा चिकित्सा तंत्र बेबस और लाचार है। गुरु नानक देव अस्पताल (जीएनडीएच) में थैलेसीमिया वार्ड में उपचाराधीन बच्चों के लिए पर्याप्त प्रबंध नहीं है। वार्ड में दस बेड हैं, लेकिन पीड़ित बच्चों की संख्या अधिक है। थैलेसीमिया वार्ड में उन बच्चों को लाया जाता है जिनके शरीर में रक्त व ग्लूकोज की मात्रा कम हो जाती है। यहां उन्हें ग्लूकोज के साथ-साथ दवाएं दी जाती हैं, पर व्यवस्थागत खामियों की वजह से अस्पताल में ऐसी हालत है कि एक बेड पर दो-दो बच्चों को भी रखा जा रहा है। बच्चों के साथ स्वजन भी आते हैं, परंतु इनके रहने का कोई ठिकाना नहीं। इन्हें भी बच्चों के साथ ही बेड पर रहना पड़ता है।

इमरजेंसी वार्ड में एक कमरे को थैलेसीमिया वार्ड का नाम दिया गया है। सोमवार सुबह थैलेसीमिया वार्ड में 11 बच्चे लाए गए। इनके साथ इनकी माताएं भी थीं। गर्मी में इन्हें भारी मुश्किल का सामना करना पड़ा। सरकारी अस्पताल में निश्शुल्क उपचार की सुविधा मिलने की वजह से अभिभावक विरोध दर्ज नहीं करवाते। वार्ड में एसी नहीं, गर्मी से बच्चे बेहाल

पहले थैलेसीमिया वार्ड बच्चा विभाग के 6वीं मंजिल पर था। यहां अमृतसर थैलेसीमिया सोसायटी के सदस्यों ने पैसे एकत्रित कर एयर कंडीशनर लगवाया था। कुछ समय पूर्व अस्पताल प्रशासन ने इस वार्ड को इमरजेंसी में शिफ्ट कर दिया। अब यहां लकड़ी का दरवाजा लगा है और एयर कंडीशनर लगाने का कोई प्रबंध नहीं। ऐसे में बच्चों का गर्मी में और बुरा हाल होता है जबकि छोटे बच्चों की सुविधा के लिए एसी का प्रबंध होना चाहिए। वार्ड की दीवारें सीलन से भरी, बेडों की हालत खस्ता

अमृतसर थैलेसीमिया सोसायटी के अध्यक्ष सतनाम सिंह का कहना है कि अस्पताल ने थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के लिए कभी कुछ नहीं किया। वार्ड में दीवारें सीलन से भरी और बेडों की हालत खस्ता है। एक बेड पर दो-दो बच्चों को रखा गया है। यदि किसी बच्चे को संक्रामक रोग है तो वह दूसरे को भी इसकी गिरफ्त में पहुंचा देगा। कुछ बच्चे अपने साथ स्कूल बैग भी लाते हैं, ताकि पढ़ाई कर सकें। इस माहौल में वह एकाग्रचित होकर पढ़ भी नहीं पाते। 25 बेड के वार्ड की मांग कर रहे: सतनाम

सतनाम सिंह ने कहा कि पंजाब सरकार इन बच्चों पर रहम करे। इनके लिए कभी कोई फंड जारी नहीं किया गया। बच्चों को प्रतिमाह खून चढ़ाना पड़ता है। इसकी व्यवस्था भी हम करते हैं। अस्पताल स्थित ब्लड बैंक में रक्त कमी होने पर हमें मैसेज किया जाता है कि बच्चों को यहां न लाएं। क्या यह उचित है? बिना रक्त के बच्चों की जिदगी कैसे बचेगी? हमने इस अव्यवस्था के खिलाफ सरकार को पत्र लिखा था, पर कोई सुनवाई नहीं हुई। हम 25 बेड की वार्ड की मांग कर रहे हैं।

Edited By: Jagran