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मलेशिया में 125 साल पुराना ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब संगतों के लिए खुला, कई हस्तियां हुईं शामिल; जत्थेदार ने किया प्रकाश

Published: Sat, 12 Sep 2026 07:05 PM (IST)

मलेशिया के पेनांग स्थित 125 वर्ष पुराने ऐतिहासिक बड़ा गुरुद्वारा साहिब को सेवा-संभाल के बाद उसके मूल स्वरूप में फिर से खोल दिया गया है।

श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़जज्ज ने गुरुद्वारा साहिब में किया प्रकाश। फोटो जागरण

श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़जज्ज ने गुरुद्वारा साहिब में किया प्रकाश। फोटो जागरण

HighLights

  1. पेनांग का 125 वर्ष पुराना गुरुद्वारा साहिब पुनः खोला गया।

  2. जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश किया।

  3. सिख विरासत के संरक्षण और गुरमुखी सिखाने पर जोर दिया गया।

जागरण संवाददाता, अमृतसर। मलेशिया के पेनांग स्थित 125 वर्ष पुराने ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब को सेवा-संभाल के बाद उसके मूल स्वरूप के अनुरूप फिर से खोल दिया गया। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़जज्ज ने शनिवार को श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के प्रथम प्रकाश पर्व के अवसर पर गुरुद्वारा साहिब में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश किया।

गुरुद्वारा साहिब की 125वीं स्थापना वर्षगांठ को समर्पित समारोह में बड़ी संख्या में संगत ने हिस्सा लिया। पेनांग के उपमुख्यमंत्री द्वितीय जगदीप सिंह दियो और बड़ा गुरुद्वारा साहिब की प्रबंधक कमेटी के निमंत्रण पर मलेशिया पहुंचे जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह ने अमृतवेले गुरुद्वारा साहिब में सुखासन स्थान से पांच प्यारों की अगुआई में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पावन स्वरूप को दरबार साहिब में सुशोभित किया।

उन्होंने चौर साहिब की सेवा निभाने के बाद पावन बीड़ को पालकी साहिब में सुशोभित किया। इसके बाद अरदास कर दरबार की मर्यादा आरंभ करने की आज्ञा ली और श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश किया। संगत को हुकमनामा भी श्रवण करवाया गया।

विशेषज्ञों की देखरेख में हों संरक्षित

इसके बाद गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और पेनांग सरकार की ओर से गुरुद्वारा साहिब के प्रांगण में भवन के पुनः आरंभ का विशेष समारोह आयोजित किया गया। इसमें मलेशिया सरकार के केंद्रीय मंत्री स्टीवन सिम, पेनांग के उपमुख्यमंत्री जगदीप सिंह दियो, बुकीत गलुगोर के सांसद रामकरपाल सिंह दियो, पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां, मलेशिया में भारतीय उच्चायुक्त सोमनाथ घोष, बड़ा गुरुद्वारा साहिब प्रबंधक कमेटी की प्रमुख नेता गुरमीत कौर और प्रधान संतोष सिंह उपस्थित थे।

इस अवसर पर जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह ने कहा कि पेनांग में सिख विरासत के प्रतीक बड़ा गुरुद्वारा साहिब को उसके मूल स्वरूप में संरक्षित करना सराहनीय प्रयास है। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद सिख विरासत को भी विशेषज्ञों की देखरेख में इसी तरह संरक्षित किया जाना चाहिए।

देश की आजादी के लिए दिया बलिदान

उन्होंने कहा कि दुनिया में जहां भी सिख गए, वहां उन्होंने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का ओट-आसरा लिया और गुरु से जुड़े रहे। मलेशिया की आजादी में भी सिखों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। कुआलालंपुर स्थित राष्ट्रीय स्मारक पर उन सिखों के नाम आज भी दर्ज हैं, जिन्होंने देश की आजादी के लिए बलिदान दिया।

जत्थेदार ने कहा कि पेनांग का बड़ा गुरुद्वारा साहिब वर्ष 1901 में स्थापित हुआ था। यह इस बात का प्रमाण है कि सिख 125 वर्ष पहले ही मलेशिया पहुंचकर मेहनत करने लगे थे और उन्होंने गुरुद्वारा स्थापित कर संगत को जोड़ा।

उन्होंने प्रबंधकों से नई पीढ़ी और बच्चों को गुरमुखी पंजाबी सिखाने के प्रयास करने की अपील की, ताकि वे गुरबाणी और सिख इतिहास से आसानी से जुड़ सकें। उन्होंने मलेशिया की सिख संगत को पंजाब से जुड़े रहने और बच्चों को श्री दरबार साहिब अमृतसर तथा श्री ननकाना साहिब के दर्शन करवाने के लिए प्रेरित किया।