जासं, अमृतसर: जिले में रबी की फसल के दौरान जरूरी खादों की एक बार फिर कमी आने की संभावना है। इसके लिए किसानों की ओर से रेल ट्रैक पर दिए जा रहे धरने ही मुख्य कारण है। रेल यातायात बहाल न होने से खेती के लिए उपयोग होने वाली खादें जिला सेंटरों तक पहुंच नहीं पा रही हैं। अमृतसर जिले में 98 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि पर गेहूं की खेती होती है। करीब तीन हजार हैक्टेयर भूमि पर देरी से भी गेंहू की खेती हुई है।

जिला कृषि अधिकारी डा. जतिदर सिंह गिल ने किसानों से अपील की है कि रेल ट्रैक से धरना समाप्त करें ताकि रेल यातायात बहाल होने से रसायनिक खादें किसानों पर पहुंचाने में सहायता मिल सके। उन्होंने कहा कि जिले में अब तक 45617 मीट्रिक टन यूरिया खाद जिले में पहुंच चुकी है जबकि 12094 मीट्रिक टन खाद की और जरूरत है। किसानों के धरने के कारण खाद के रैक अमृतसर पहुंच नहीं पा रहे हैं। अगर किसानों ने धरना न उठाया तो यूरिया की कमी का किसानों को ही सामना करना पड़ सकता है। प्रति एकड़ दो बोरियों से अधिक यूरिया खेत में न डालें

डा. गिल ने किसानों से भी अपील की है कि समय पर बीजे गए गेहूं को कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार ही खाद डालें। प्रति एकड़ दो बोरियों से अधिक यूरिया खेत में न डाली जाए जोकि गेहूं की बुआई से 55 दिनों के भीतर डालनी चाहिए। अधिक खाद डालने पर उत्पादन तो बढ़ता नहीं है बल्कि विभिन्न बीमारियां फसल को लग जाती हैं। वहीं कई तरह के कीटों का भी फसल पर हमला बढ़ जाता है।

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