-जौड़ा फाटक रेल हादसा :

लापरवाही से हुई मौतों के मामले में जीआरपी ने कसना शुरू किया शिकंजा, फिलहाल अज्ञात पर दर्ज है एफआइआर

फोटो नंबर- 82-83

नवीन राजपूत. अमृतसर : जौड़ा फाटक रेल हादसे में 58 लोगों की मौत के मामले में जीआरपी ने क्रिमिनल इनवेस्टिगेशन तेज कर दी है। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिदर सिंह की तरफ से बनाई गई स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम (एसआइटी) ने 14 फरवरी को नगर निगम अमृतसर को पत्र लिखकर जिम्मेदार अफसरों पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट तलब की है।

बताया जा रहा है कि जीआरपी ने कुछ दिन पहले सार्वजनिक हुई मजिस्ट्रेट रिपोर्ट को आधार बनाकर कार्रवाई की है। जिसमें पूर्व मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के खासमखास सौरव मदान उर्फ मिट्ठू मदान सहित 23 लोगों को जिम्मेदार ठहराया गया था।

एसआइटी के चेयरमैन नगर निगम अमृतसर को पत्र लिखकर सचिव कम एस्टेट अफसर सुशांत भाटिया, एडीएफओ कश्मीर सिंह, सुपरिटेंडेंट पुष्पिंदर सिंह, इंस्पेक्टर गरीश कुमार, इंस्पेक्टर केवल कृष्ण, सुपरवाइजर कमलदीप सिंह और क्लर्क अरुण कुमार के खिलाफ की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। जीआरपी ने दर्दनाक हादसे के बाद 19 अक्तूबर 2018 को आइपीसी की धारा (304-ए, 337-338) के तहत अज्ञात आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया था। दूसरी तरफ, जालंधर डिवीजन के मजिस्ट्रेट बी पुरुषार्थ ने हादसे की जांच के बाद दशहरा दहन करने वाली कमेटी के प्रधान सौरव मदान उर्फ मिट्ठू मदान, राहुल कल्याण, सचिव करण भंडारी, काबल सिंह, प्रेस सचिव दीपक गुप्ता, कैशियर दीपक, भूपिदर सिंह, पुलिस विभाग से एसीपी प्रभजोत सिंह, एएसआइ दलजीत सिंह, कमलप्रीत कौर, सतनाम सिंह, सांझ केंद्र के इंचार्ज बलजीत सिंह, अतिरिक्त थाना प्रभारी सुखनिदर सिंह मोहकमपुरा थाना प्रभारी अवतार सिंह, नगर निगम के एस्टेट अफसर सुशांत भाटिया, केवल कृष्ण, पुष्पिदर सिंह, गरीश कुमार, अरुण कुमार, हादसे को अंजाम देने वाली डीएमयू के पायलेट, असिस्टेंट लोको पायलट, गार्ड, गेटमैन निर्मल सिंह को हादसे का जिम्मेदार बताया था। राजनीतिक दबाव के चलते दशहरा कमेटी के प्रधान सौरव मदान ने उक्त रिपोर्ट को दबा दिया था। शिकंजा कसना शुरू हुआ : वेरका

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस अजीत सिंह बैंस की अगुआई में चल रहे मानवाधिकार संगठन के चीफ इनवेस्टिगेटर सरबजीत सिंह वेरका ने बताया कि अब हादसे के जिम्मेदार लोगों पर आपराधिक शिकंजा कसना शुरू हो गया है। बता दें। सरबजीत वेरका के प्रयास से दबाई गई मजिस्ट्रेट जांच को सार्वजनिक किया गया था।

Posted By: Jagran

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