अमृतसर, जेएनएन। श्रद्धालु सोने और हीरे से तैयार किए गए दुर्लभ हस्‍तलिखित दिव्‍य स्‍वरूपों के दर्शन कर सकेंगे। श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व को समर्पित अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस विशेष बस में इनको प्रदर्शित किया जाएगा। यह बस 21 अक्टूबर को पंजाब यूनिवर्सिटी पटियाला से रवाना की जाएगी। यह बस एक कारोबारी ने 62 लाख रुपये में तैयार करवाई है।

सरबत द भला चेरिटेबल ट्रस्ट के संस्थापक व दुबई के प्रसिद्ध कारोबारी डॉ. एसपी सिंह ओबराय की तरफ से तैयार करवाई इस बस में सोने, हीरे तथा बेशकीमती स्याही से तैयार 16 दुर्लभ और पुरातन हस्त लिखित स्वरूप सुशोभित होंगे। शहरों, गांवों तथा कस्बों में धीमी गति से गुजरने वाली इस बस का लाखों श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे।

550वें प्रकाश पर्व को समर्पित 62 लाख से तैयार बस कल पंजाबी यूनिवर्सिटी से होगी रवाना

ओबराय और पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला के श्री गुरु ग्रंथ साहिब अध्ययन विभाग के प्रमुख प्रो. डॉ. सरबजिंदर सिंह के अनुसार ट्रस्ट की ओर से 62 लाख रुपये की लागत इस विशेष बस को तैयार कराया गया है। बस को 21 अक्टूबर को  कैबिनेट मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा, सीएम के चीफ प्रिंसिपल सेक्रेटरी सुरेश कुमार तथा वाइस चांसलर डॉ. बीएस घुम्मन श्री गुरु ग्रंथ साहिब भवन के सामने से रवाना करेंगे।

उन्‍होंने बताया कि इसका पहला पड़ाव पटियाला शहर होगा। दूसरे पड़ाव में यह बस यूनिवर्सिटी पटियाला से चल कर डेरा बाबा नानक पहुंचेगी। यहां से बस पंजाब के विभिन्न शहरों में स्थित तीन तख्त साहिब और उसके बाद बाहरी राज्यों में स्थित दो तख्त साहिब तक जाएगी। इसके बाद यह बस निर्धारित किए रूट के मुताबिक अलग-अलग गांवों, शहरों तथा कस्बों से होती हुई सुल्तानपुर लोधी पहुंचेगी।

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डिजिटल डिस्पले बोर्ड पर अलग-अलग भाषाओं में दी जाएगी दुर्लभ स्वरूपों की जानकारी

डॉ. ओबराय ने कहा कि बस पर लगा डिजिटल डिस्पले बोर्ड इन स्वरूपों के बारे में पंजाब में पंजाबी और अंग्रेजी में जबकि अन्य राज्यों में सफर के दौरान वहां की लोकल भाषाओं तथा अंग्रेजी में जानकारी देगा।  यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता पूर्ण मर्यादा के साथ इस बस की संभाल करेंगे और दुर्लभ स्वरूपों का संगतों को दर्शन दीदार करवाएंगे।

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प्रो. सरबजिंदर सिंह ने कहा कि ट्रस्ट का 550वें प्रकाश पर्व को समर्पित अपनी तरह का नया प्रयास है। सोने और हीरे से तैयार किए गए अलग-अलग ग्रंथ कुछ नानक नाम लेवा सिख घरानों द्वारा पीढ़ी दर पीढ़ी सहेज कर रखे गए थे। अब इन दुर्लभ हस्त लिखित स्वरूपों का संग्रह किया गया है ताकि यह स्वरूप निजी मलकीयत से राष्ट्रीय संपत्ति बन सकें।

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Posted By: Sunil Kumar Jha

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