जागरण संवाददाता, अमृतसर: भारतीय सेना की ओर से इस वर्ष सेना की अलग-अलग बटालियनों में पंडित की पोस्टों की भर्ती के लिए जारी किए गए विज्ञापन में शास्त्री को बीए के बराबर की डिग्री के रूप में मान्यता देने से इन्कार कर दिया है। इसके विरोध में शास्त्री की डिग्री वाले विद्यार्थियों ने प्रधानमंत्री, शिक्षा मंत्री और रक्षा मंत्री को पत्र भेजकर शास्त्री की डिग्री के मामले में रिव्यू करने की मांग की है।

केंद्र सरकार को पत्र भेजने वाले अलग अलग शास्त्री पास विद्यार्थियों शुभम कुमार शर्मा, भवानी शर्मा, रोहित शर्मा, चंद्रप्रकाश शर्मा, पंडित राजेश कुमार ने कहा कि पहले शास्त्री की डिग्री हासिल करने वाले सेना में पंडित की पोस्ट के लिए ग्रेजुएशन के बराबत मनाना जाता था। वहीं यूजीसी की ओर से भी शास्त्री की डिग्री को बीए की डिग्री के बराबर मान्यता दी हुई है। परंतु इस बार सेना में पंडितों की 180 पोस्टों की भर्ती के लिए विज्ञापन दिया गया। पंडित जेसीओ की पोस्ट के लिए पहले शास्त्री को मान्यता थी परंतु इस बार भारतीय सेन की ओर से दिए गए विज्ञापन में शास्त्री को बीए के बराबर नहीं माना गया है। जिस के कारण शास्त्री डिग्री धारक उम्मीदवार सेना में पंडित जेसीओ की पोस्ट के लिए एप्लाई नहीं कर सकते है। इस बार पोस्टों के लिए बीए या शास्त्री व इस के साथ कार्मकाड का डिप्लोमा अनिवार्य या आचार्य की डिग्री होना जरूरी है। जो कि संस्कृत के विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि देश भर के शास्त्री विद्यार्थी इस मामले को लेकर आदालत में भी जाएंगे और जन आंदोलन भी करेंगे। विभिन्न संस्थाओं ने भी रखा केंद्र सरकार के समक्ष मुद्दा

मामले के संबंध में अखिल भारतीय संस्कृत परिषद के नेता डा. शिव कुमार प्रेम और पुष्पराज शर्मा ने कहा कि इसके लिए उनके संस्थान ने भारत सरकार और रक्षा मंत्री को रिव्यू करने के लिए पत्र भेजा है। वहीं अखिल भारत हिदू विद्यार्थी सभा के अध्यक्ष विकास कुमार बेरी ने कहा कि मामला गंभीर है। यह देश के लाखों संस्कृत विद्यार्थियों के भविष्य के साथ जुड़ा मुद्दा है। इस के लिए हिन्दू विद्यार्थी सभा जल्दी ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री और केंद्रीय रक्षा मंत्री से मुलाकात करके इस मामले को सुलझाएंगे।

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