र¨वदर शर्मा, अमृतसर

सेफ स्कूल वाहन पालिसी के तहत सड़कों पर दौड़ने वाली कंडम और बाहरी राज्य की गाड़ियों को हटाए जाने संबंधी रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (आरटीए) सचिव रजनीश अरोड़ा ने मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर (एमवीआइ) से रिपोर्ट तलब की है। इसका मकसद जहां बच्चों की सुरक्षा है,वहीं स्कूल मुखियों को भी इसके लिए जिम्मेवार ठहराया जाना है। इसके मद्देनजर ही एमवीआइ ने जिला के स्कूल मुखियों को नोटिस जारी कर अपने स्कूलों से संबंधित गाड़ियों की पा¨सग करवाए जाने की हिदायतें दी हैं।

विभागीय जानकारी के मुताबिक जिला में करीब 500 स्कूल हैं, जिनके ¨प्रसिपलों ने बच्चों को लाने और ले जाने के लिए स्कूल बस मालिकों से करार कर रखा है। सुप्रीम कोर्ट की हिदायतों के तहत बच्चों को स्कूल लाने और ले जाने वाले वाहनों में सीसीटीवी कैमरों के अलावा हाईड्रॉलिक दरवाजे होने चाहिए। इसके साथ ही लड़कियों वाली स्कूल बस में महिला अटेंडेंट का होना लाजिमी है। इसमें कहा गया है कि 15 साल से एक दिन भी पूराने वाहन तो बच्चों को लाने और ले जाने के लिए बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं होने चाहिए।

कंडम बसों पर नहीं कोई क्लेम

विभाग मानता है कि जिला में कई स्कूलों में दिल्ली, यूपी, हरियाणा या अन्य राज्यों से कंडम बसें लाकर यहां स्कूली बच्चों के लिए इस्तेमाल की जा रही हैं। यह वह बसें हैं जिनका कभी दुर्घटना होने की सूरत में न तो ड्राइवर को और न ही किसी अन्य को किसी तरह का कोई क्लेम नहीं मिलता। विभाग भी सिर्फ पंजाब के नंबर वाली गाड़ियों को ही इस पालिसी के तहत पास करता है और वह भी स्कूल मुखी से लिखित लेने के बाद।

307 या 302 का पर्चा दर्ज किए जाने का है प्रावधान

सुप्रीम कोर्ट की सेफ स्कूल वाहन पालिसी के तहत कंडम बसों को स्कूलों के लिए प्रयोग करने और इस दौरान दुर्घटना होने की सूरत में वाहन के चालक पर आइपीसी की धारा 307 या आइपीसी की धारा 302 के तहत पर्चा दर्ज किए जाने का प्रावधान है। क्योंकि एसी सूरत में चालक सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करता तो इसके विरुद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

ऑटो हैं टोटली प्रतिबंधित

मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर गुरमीत ¨सह कहते हैं कि थ्री व्हीलर / आटो पर स्कूली बच्चों के लिए इस्तेमाल करना पूरी तरह से प्रतिबंधित है। इनके स्थान पर छोटी गाड़ियों को, जिनमें 12 सीटें या इससे अधिक हों को ही पास किया जाता है। पंद्रह साल से 1 दिन भी पुरानी या बाहरी राज्यों की बस को तो स्कूल के लिए बिल्कुल पास नहीं किया जाता।

ट्रैफिक पुलिस को करनी चाहिए सख्ती : सरीन

आरटीआई एक्टिविस्ट वरुण सरीन कहते हैं कि इसमें सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका ट्रैफिक पुलिस की रहती है। क्योंकि वाहन सड़कों पर दौड़ते हैं और ट्रैफिक पुलिस सड़कों पर ही मुस्तैद होती है। इसलिए सेफ स्कूल वाहन पालिसी को सख्ती से लागू करने में ट्रैफिक पुलिस को सख्त रुख अपना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट की हिदायतों की अवहेलना करने वालों को तो बिल्कुल भी बख्शना नहीं चाहिए और उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

कोट

मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर की रिपोर्ट के बाद स्कूली वाहनों की चे¨कग अभियान शुरु किया जाएगा। पंद्रह साल से पुरानी और बाहरी राज्य की बसों को इंपाउंड कर दिया जाएगा। लड़कियों वाली स्कूल बस में महिला अटेंडेंट के नहीं होना लाजिमी है और इसमें लापरवाही बरतने वाले वाहनों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होगी। रजनीश अरोड़ा, सचिव, रिजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी, अमृतसर।

Posted By: Jagran