जेएनएन, अमृतसर। शिरोमणि सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी  (एसजीपीसी) के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लोंगोवाल ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर सिख इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगाया है। उन्‍होंने कहा कि आरएसएस अपनी सिख विरोधी हरकतों से बाज आए। उन्होंने केंद्र व महाराष्ट्र सरकार से इस संबंध में सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि आरएसएस के मुख्यालय नागपुर से भारती प्रकाशन द्वारा प्रकाशित किताबों में गुरु साहिबान को हिंदू दिखाने का प्रयास किया गया है। इससे सिखों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने बताया कि इसे लेकर एसजीपीसी द्वारा केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर व महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग को लेकर पत्र भेजा गया है।

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उन्होंने कहा कि विवादित पुस्तकों को आरएसएस तुरंत वापस ले तथा सिख कौम से सार्वजनिक तौर पर माफी मांगे। उन्होंने कहा कि जल्द ही एसजीपीसी की तरफ से उच्च स्तरीय सिख इतिहास पुस्तक संबंधी कमेटी गठित की जाएगी। इसमें सिख विद्धानों के साथ-साथ कानूनी माहिरों को भी शामिल किया जाएगा।

आरएसएस पर लगे पाबंदी : मक्कड़

एसजीपीसी के पूर्व अध्यक्ष जत्थेदार अवतार सिंह मक्कड़ ने आरएसएस के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग करते हुए इस पर पाबंदी लगाने की मांग की है। उन्होंने इसे आरएसएस की  साजिश बताते हुए कहा कि 2016 में हिंदी में प्रकाशित उक्त पुस्तकों को अब रिलीज किया जा रहा है।

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Posted By: Sunil Kumar Jha

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