हरीश शर्मा, अमृतसर

गुरु नगरी के रेलवे स्टेशन पर लगेज स्कैनर के इस्तेमाल को लेकर जारी लापरवाही पर चौबीस घंटे में ही रोक लग गई है। मंगलवार तक जहां जीआरपी और आरपीएफ के जवान स्कैनर के इस्तेमाल को लेकर लापरवाह बने हुए थे वह वरिष्ठ अधिकारियों की फटकार लगने के बाद जिम्मेदारी संभालने में जुट गए हैं। दैनिक जागरण द्वारा सुरक्षा में सुराख का मुद्दा उठाए जाने के बाद बुधवार को दोनों विभागों के सुरक्षाकर्मी सजग नजर आए और बीते दिनों जिस 29 लाख रुपये की लागत से लगे स्कैनर का इस्तेमाल नहीं हो रहा था उस पर बुधवार को लगेज की जांच होनी शुरू हो गई है। वहीं रेलवे स्टेशन के चोर रास्तों पर भी सुरक्षाकर्मियों को तैनात कर दिया गया है ताकि संदिग्ध लोगों पर नजर रखी जा सके और रेलवे स्टेशन पर आने जाने वाले हर यात्री को मुख्य द्वार से अंदर से बाहर और बाहर से अंदर जाने की प्रक्रिया को यकीनी बनाया जा सके।

रेलवे स्टेशन की सुरक्षा को लेकर बुधवार को एक बार फिर दैनिक जागरण की टीम ने रेलवे स्टेशन का दौरा किया तो आरपीएफ और जीआरपी के जवान स्कैनर पर यात्रियों के लगेज की जांच करते दिखे। जबकि मंगलवार को इसी जगह केवल 20 से 25 फीसद यात्रियों के लगेज की जांच की जा रही थी। सुरक्षा में इस तरह की लापरवाही का मुद्दा दैनिक जागरण ने प्रमुखता के साथ उठाया था और इसके परिणाम स्वरूप बुधवार को चौकसी बढ़ा दी गई है।

अन्य चोर रास्तों पर भी लगाए गए सुरक्षाकर्मी

रेलवे स्टेशन के अंदर जाने और बाहर आने के लिए तीन अन्य प्वाइंट भी हैं। यह गोलबाग साइड, पार्सल घर की तरफ से और फूड प्लाजा के साथ एस्केलेटर की तरफ हैं। मंगलवार को यहां भी अव्यवस्था का आलम था। इन तीनों रास्तों से भी बड़ी संख्या में यात्री रेलवे स्टेशन में आते-जाते हैं। जो हजारों यात्रियों की सुरक्षा को खतरा खड़ा कर सकते हैं। इन तीनों रास्तों पर नजर रखना भी जीआरपी और आरपीएफ की जिम्मेदारी है। बुधवार को इन तीनों जगह सुरक्षाकर्मी तैनात कर दिए गए हैं, ताकि इन रास्तों से लोगों को आने जाने से रोका जा स सके।

- स्कैनर पर तैनात कर्मचारियों को आदेश दिया गया हैं कि हर किसी के सामान को स्कैन किया जाए। अगर कोई भी कर्मचारी इसमें चूक करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। इसके अलावा जीआरपी के अधिकारियों के साथ भी बात की गई है ताकि उनके कर्मचारी भी आरपीएफ की मदद करें। इसके अलावा अन्य सभी रास्तों पर भी कर्मचारियों को लगातार नजर रखने को कहा गया हैं।

- मोहन लाल, इंस्पेक्टर आरपीएफ, अमृतसर।

Posted By: Jagran

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