नितिन धीमान, अमृतसर : इंद्रधनुष के सात रंगों को प्रदर्शित करने वाला केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का प्रोजेक्ट 'मिशन इंद्रधनुष' अमृतसर में फीका रहा है। चार वर्ष पूर्व कार्यान्वित हुए इस प्रोजेक्ट के तहत 0 से 2 साल बच्चों को डिफ्थेरिया, बलगम, टिटनेस, पोलियो, तपेदिक, खसरा तथा हेपिटाइटिस-बी इत्यादि खतरनाक बीमारियों से बचाने के लिए सात प्रकार की वैक्सीन लगाने का प्रावधान रखा गया था। दुखद पहलू यह रहा कि स्वास्थ्य विभाग के निचले स्तर के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने इस मिशन को गंभीरतापूर्वक नहीं लिया। यही वजह है कि अमृतसर के 98 गांवों में बच्चों को एक-दो इंजेक्शन लगाकर प्रोजेक्ट को कागजी तौर पर अमलीजामा पहनाया गया।

दरअसल, मिशन इंद्रधनुष के अंतर्गत जिले के सात ब्लॉक रमदास, तरसिक्का, थरीएवाल, मानांवाला, बाबा बकाला, वेरका, लोपोके के 98 गांवों को चिह्नित किया गया था। यहां रहने वाले तकरीबन 6800 बच्चों को सात प्रकार की वैक्सीन लगाई जानी थी। इसका दायित्व एलएचवी व एएनएम को सौंपा गया था। इसके अलावा सरकारी अस्पतालों में भी वैक्सीन की सुविधा उपलब्ध करवाई गई थी। एलएचवी व एएनएम को घर-घर जाकर बच्चों की वैक्सीनेशन करने का विभागीय आदेश दिया गया था।

स्वास्थ्य विभाग से जुड़े विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि एएनएम व एलएचवी ने उपरोक्त ब्लॉक के गांवों में रहने वाले बच्चों को एक या दो इंजेक्शन लगाकर अपनी ड्यूटी पूरी कर डाली। सरकारी अस्पतालों में भी मिशन इंद्रधनुष की ओर ज्यादा ध्यान न दिया गया। वैक्सीनेशन न लगने की भनक जब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को लगी तो इसका जवाब मांगा गया। अब सिविल सर्जन कार्यालय अमृतसर की ओर से इन ब्लॉकों में सर्वे करवाया जा रहा है।

वास्तव में इस अभियान की सफलता का मंत्र यही था कि बच्चों का संपूर्ण टीकाकरण किया जाए। यदि एक भी वैक्सीन छूट गई तो यह मिशन सफल नहीं समझा जाएगा। केंद्र सरकार की इस योजना पर अमृतसर में पूरी शिद्दत से काम नहीं हुआ। यह जानकर हैरानी होगी कि जिस अभियान को चार सालों में पूरा न किया जा सका, उसका सर्वे सिविल सर्जन कार्यालय ने चार दिन में ही कर डाला। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि कुछ बच्चों की वैक्सीन मिस हुई है। हमने चार दिनों में सर्वे करवा लिया, जिसमें स्पष्ट हुआ है कि 6300 बच्चों को वैक्सीन दी गई थी। कहना गलत न होगा कि यह सर्वे भी टीकाकरण की तरह ही होगा।

सर्वे का काम जारी : सिविल सर्जन

सिविल सर्जन डॉ. हरदीप ¨सह घई का कहना है कि चार साल पहले शुरू हुए इस प्रोजेक्ट की पुन: समीक्षा की जा रही है। सभी ब्लॉकों में सर्वे का काम जारी है। प्रत्येक गांव में तीन—चार बच्चे ही ऐसे होंगे जिन्हें वैक्सीन नहीं लगी। जो बच्चे वैक्सीन से वंचित रह गए हैं उन्हें 27 अप्रैल तक कवर कर लिया जाएगा। हम घर—घर जाकर रिपोर्ट कलेक्ट कर रहे हैं। डॉ. घई ने स्पष्ट किया कि मिशन इंद्रधनुष का एक भी इंजेक्शन नहीं लगाया जाए तो यह मिशन पूरा नहीं हो सकता।

बाल मृत्यु दर रोकने के

लिए शुरू हुआ था मिशन

मिशन इंद्रधनुष की शुरूआत 15 दिसंबर 2014 को हुई थी। इसे सफलता के पायदान चढ़ाने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने पहले चरण में देश के 201 जिलों को चिन्हित किया, जहां 50 प्रतिशत बच्चों को टीके नहीं लगे। चूंकि प्रतिवर्ष 5 लाख बच्चों की मौत ऐसी बीमारियों से हो जाती है, जिनसे टीके लगवा कर बचा जा सकता है। मत्यु दर को कम करने के लिए मिशन इंद्रधनुष के तहत बच्चों को सात प्रकार की वैक्सीन लगाने का प्रावधान था।

Posted By: Jagran

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