जागरण संवाददाता, अमृतसर

सरकारी मेडिकल कॉलेज स्थित नशा मुक्ति केंद्र में नियमों पर ताक पर रखकर दो कर्मचारियों को नौकरी पर रखा गया है। इनमें एक दफ्तरी सुप¨रटेंडेंट व दूसरा लैब टेक्निशियन है। इन दोनों पदों पर नशा मुक्ति केंद्र के प्रभारी ने अपने चहेतों को विराजमान करने के लिए नियम-कानून को दरकिनार कर दिया। एक दिन में नौकरी के लिए नोटिस तैयार करवाया गया और अगले दिन अपने दो चहेतों को नौकरी पर रख लिया गया। यह खुलासा आरटीआइ कार्यकर्ता रा¨जदर शर्मा राजू व र¨वदर सुल्तान¨वड ने शनिवार को पत्रकार सम्मेलन में किया।

आरटीआइ कार्यकर्ताओं ने कहा कि नशा मुक्ति केंद्र के प्रभारी डॉ. पीडी गर्ग ने दफ्तरी सुप¨रटेंडेंट व लैब टेक्निशियन के पद भरने के लिए 30 अप्रैल 2016 को एक प्रार्थना पत्र सरकारी मेडिकल कॉलेज के तत्कालीन ¨प्रसिपल डॉ. बीएस बल को लिखा था। पत्र में उन्होंने कहा था कि नशा मुक्ति केंद्र में कामकाज सुचारू ढंग से चलाने के लिए एक दफ्तरी सुप¨रटेंडेंट व लैब टेक्निशियन की जरूरत है। 3 मई 2016 को ¨प्रसिपल ऑफिस से इस पत्र पर डायरी नंबर लगाकर डॉ. पीडी गर्ग को उपरोक्त पद भरने के लिए कहा गया। इसके बाद डॉ. पीडी गर्ग ने अगले दिन यानी 4 मई 2016 को सुबह साढ़े दस बजे इंटरव्यू का दिन मुकर्रर कर दिया। यह महज खानापूर्ति थी, क्योंकि एक दिन में किसी को यह मालूम नहीं हो सकता था कि नशा मुक्ति केंद्र में इंटरव्यू रखा गया है। 4 मई को ही इंटरव्यू का ड्रामा रचकर डॉ. गर्ग ने जसबीर ¨सह रंधावा नामक शख्स को दफ्तरी सुप¨रटेंडेंट के रूप में तैनात कर दिया। जसबीर ¨सह रंधावा डिप्टी कमिश्नर अमृतसर ऑफिस से सेवानिवृत्त हुए हैं। डॉ. गर्ग ने रंधावा को 4 मई को ही नौकरी ज्वाइन भी करवा दी।

रा¨जदर शर्मा राजू ने कहा कि इन पदों के लिए प्रशासन ने विज्ञापन भी जारी नहीं किया। असल में डॉ. पीडी गर्ग ने सुनियोजित ढंग से अपनों को नौकरी दिलवाई और नौकरी के असल हकदारों का हक मारा है। इस सारे घोटाले के उनके पास दस्तावेज हैं, इसलिए सरकार इस मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाए। रा¨जदर शर्मा ने कहा कि डॉ. पीडी गर्ग सेवा?मुक्ति के बाद सरकार से एक्सटेंशन लेकर काम कर रहे हैं।

मेरे खिलाफ रहते हैं आरटीआइ कार्यकर्ता : डॉ. पीडी गर्ग

दूसरी तरफ डॉ. पीडी गर्ग ने कहा कि यह आरोप बेबुनियाद हैं। आरटीआइ कार्यकर्ता हमेशा उनके खिलाफ रहते हैं। वह हमेशा मुझे निशाना बनाते हैं। नशा मुक्ति केंद्र में जो भी भर्ती हुई, वह नियमानुसार हुई हैं। सुप¨रटेंडेंट की भर्ती के समय बाकायदा इश्तेहार जारी किया गया और इंटरव्यू के दौरान बोर्ड ने पूरी पारदर्शी ढंग से काम किया।

Posted By: Jagran