जागरण न्यूज नेटवर्क, अमृतसर : पूर्व मंत्री प्रो. लक्ष्मीकांता चावला ने कहा कि नए ट्रैफिक नियमों को लागू करने वाली पुलिस मानवता भूल गई है। जिस ढंग से इन दिनों चालान करने के नाम पर लोगों को बर्बरता से पीटा जा रहा है, उसका क्रूर उदाहरण बीते दिन यूपी के सिद्धार्थ नगर से पूरे देश ने देखा। उस व्यक्ति का विशेष धन्यवाद जिसने पुलिस की यह गैर इंसानी हरकत पूरे देश को दिखाई, पर अफसोस यह भी है कि सड़कों पर खडे़ दूसरे लोग देखते रहे।

सरकार से सवाल यह है कि क्या जो हेल्मेट नहीं पहनेगा उसे जान से मार दोगे? पुलिस वालों को वर्षों पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक जज ने यह कहा था कि यह गुंडों का संगठित गिरोह है। अब तो सड़कों पर इनका असली रूप दिखाई देने लग गया। वैसे भी कहीं अस्सी हजार रुपये का चालान, कहीं एक लाख 41 हजार का चालान और कहीं दो लाख से ज्यादा का ट्रक वाले का चालान, क्या हिदुस्तान के आम आदमी में इतनी बड़ी जुर्माना राशि देने की हिम्मत है? अच्छा हो सरकार पुलिस वालों के साथ इनकम टैक्स वालों को भी सड़कों पर भेज दे कि जो बड़ा जुर्माना दे उसकी आमदनी का स्त्रोत भी पूछा जाए। जनता को यह अधिकार दिया जाए कि जो चालान करने वाली मशीनरी स्वयं कानून का पालन नहीं करती उसको सड़कों पर रोक कर जनता पूछे और उनके चालान करे। यह ठीक है कि इससे अराजकता पैदा होगी, पर इस अराजकता की जिम्मेवार वे सरकारें होंगी जो कानून बनाते समय देश की असलियत को नहीं समझतीं। सरकारें सावधान रहें, जनता हमेशा के लिए तंत्र की गुलाम नहीं हो सकती, क्योंकि यहां लोकतंत्र है।

Posted By: Jagran

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