विपिन कुमार राणा, अमृतसर : पंजाब लोक कांग्रेस (पीएलसी) ने विधानसभा हलका दक्षिणी से पूर्व विधायक हरजिदर सिंह ठेकेदार को मैदान में उतारा है। टकसाली कांग्रेस ठेकेदार कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगा पाएंगे या नहीं, इस पर ही उनकी चुनावी डगर निर्भर है। ठेकेदार ने 1997 में पहला चुनाव लड़ा था और हार गए थे। उसके बाद 2002 में उन्होंने वर्तमान विधायक इंद्रबीर सिंह बुलारिया के पिता रमिदर सिंह बुलारिया को हराया था और 2007 में उनसे हार गए थे। ठेकेदार पंजाब कांग्रेस सरकार में पंजाब बैकवर्ड क्लासेस फाइनांस एंड लैंड डेवलपमेंट बोर्ड के चेयरमैन रहे और उनका शुमार कैप्टन अमरिदर सिंह के करीबियों में था। कैप्टन के कांग्रेस छोड़ने से पहले ही ठेकेदार ने बुलारिया की टिकट को चुनौती देनी शुरू कर दी थी।

बता दें कि पिछले 40 साल से कांग्रेस में सक्रिय ठेकेदार ने आतंकवाद के समय से हलके में कांग्रेस का झंडा बुलंद किए रखा। ठेकेदार 2002 में हलके से कांग्रेस की टिकट पर विधायक रहे है और तत्कालीन कांग्रेस सरकार में उन्हें वन निगम का चेयरमैन पद भी मिला। 2012 व 2017 में भी वह पार्टी टिकट के दावेदारों में से एक थे, पर तब क्रमश: जसबीर सिंह डिपा और इंद्रबीर सिंह बुलारिया को कांग्रेस की टिकट दे दी गई। बुलारिया 10 दिसंबर, 2016 में अकाली दल छोड़ कांग्रेस में शामिल हुए थे। सीटिग विधायक होने की वजह से वह कांग्रेस की टिकट 2017 में लेने में सफल रहे। कैप्टन और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच चले सियासी द्वंद में ठेकेदार कैप्टन के साथ ही रहे और उन्होंने हलके से चुनाव लड़ने की पहले ही तैयारी शुरू कर दी थी। उनके बेटे मनिदर सिंह ठेकेदार नगर सुधार ट्रस्ट में ट्रस्टी भी हैं।

हलके में बड़ी संख्या में बीसी वोटर

विधानसभा हलका दक्षिणी की बात करे तो इसमें बैकवर्ड क्लासेस वोटर बड़ी संख्या में है। यही वजह रही कि यहां से पूर्व में बीसी कैटेगरी से संबंधित नेता कृपाल सिंह, पृथीपाल सिंह, मनिदरजीत सिंह बिट्टा जैसे नेताओं ने यहां से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। ठेकेदार का शुमार भी बीसी कैटेगरी में होता है और वह हलके से विधायक भी रह चुके है और वर्तमान में भी बैकवर्ड क्लासेस फाइनांस एंड लैंड डेवलपमेंट बोर्ड पंजाब के चेयरमैन है और बतौर चेयरमैन बैकवर्ड क्लासेस तक सरकार की अहम योजनाएं पहुंचाने में भी उन्होंने अहम भूमिका अदा की।

भाजपा का साथ बहुत जरूरी

भाजपा—पीएलसी गठबंधन में पीएलसी के खाते में यह सीट जाने से पार्टी टिकट के दावेदार क्षुब्ध है। अकाली-भाजपा गठबंधन में यह सीट अकाली दल के खाते में थी। इस बार भाजपा की तरफ से भाजपा बीसी मोर्चे के प्रदेश महासचिव व रामगढि़या भलाई बोर्ड के सीनियर वाइस चेयरमैन रहे कंवरबीर सिंह मंजिल टिकट की दौड़ में थे और भाजपा के मंडल प्रधान भी उनका समर्थन कर रहे थे। अब टिकट की घोषणा के बाद ठेकेदार के लिए भाजपाइयों को साथ लेकर चलना होगा, तभी वह बाकी प्रत्याशियों के सामने चुनौती खड़ी कर सकेंगे। चिकोणे मुकाबले के लिए मैदान तैयार

तीन दलों से यह हैं प्रत्याशी

कांग्रेस : इंद्रबीर सिंह बुलारिया

चौथी बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे है। पिता विधायक रमिदर सिंह बुलारिया के देहात के बाद 2008 में अकाली दल की टिकट पर पहली बार चुनाव लड़ा। 2012 में भी अकाली दल और 2017 में कांग्रेस की टिकट पर जीत दर्ज की।

आप : डा. इंद्रबीर सिंह निज्जर

2017 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा था और 24923 यानी 26.7 फीसद वोट लेते हुए दूसरे नंबर पर रहे थे। आप हाईकमान ने इस बार भी उन पर ही अपना विश्वास व्यक्त किया है।

अकाली दल : तलबीर सिंह गिल

पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे है। पूर्व कैबिनेट मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया के निजी सहायक रहे है और वरिष्ठ अकाली नेता है। 2017 के चुनाव में अकाली दल को 16596 यानी 17.78 फीसद वोट मिले थे और तीसरे नंबर पर रहा था।

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