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विपिन कुमार राणा, अमृतसर

झमाझम बारिश के साथ ही शहर में खड़ी जर्जर इमारतें लोगों को डराने लगी हैं। हर साल हादसों का सबब बनने वाली इमारतों से नगर निगम ने सीख नहीं ली। पूर्व में बारिश शुरू होने के साथ ही डिप्टी कमिश्नर ने शहर की जर्जर इमारतों का ब्यौरा निगम से मांगा था। मगर विडंबना ही कहेंगे कि आज तक इसका सर्वे पूरा नहीं हो सका। इससे पहले इसका कड़ा संज्ञान लेते हुए एमटीपी परपाल सिंह ने विभागीय सभी एटीपीज व बिल्डिंग इंस्पेक्टरों को शोकॉज नोटिस जारी करते हुए इस बाबत तीन दिनों में जवाब देने को कहा है, लेकिन हाईकोर्ट के आदेशों पर अवैध इमारतों का सर्वे करने में जुटे विभागीय अधिकारियों ने जर्जर इमारतों की तरफ ज्यादा ध्यान दे पाए।

बताते चलें कि डिप्टी कमिश्नर कार्यालय ने 12 जून को एमटीपी विभाग को लिखे गए पत्र में शहर में स्थित पुरानी व खतरनाक जर्जर इमारतों का ब्यौरा मांगा था। 27 जून को एमटीपी विभाग ने सभी एटीपीज व बिल्डिंग इंस्पेक्टरों से इस बाबत रिपोर्ट देने को कहा था। लेकिन जब किसी ने इसकी रिपोर्ट नहीं दी तो एमटीपी ने इसे काम के प्रति कोताही करार देते हुए तीन दिनों में स्पष्टीकरण देने को कहा। उसके बाद भी जर्जर इमारतों का अभी तक सर्वे पूरा नहीं हो सका। लेकिन बरसात के साथ ही सर्वे के साथ कार्रवाई के भी कमिश्नर ने उन्हें निर्देश दे दिए हैं। बताते चलें कि साल 2018 में बरसाती मौसम शुरू होने से पहले एमटीपी द्वारा किए गए सर्वे में शहर में 128 के करीब जर्जर इमारतें थीं, जो कभी भी जमींदोज हो सकती

हैं। निगम द्वारा 2013 में किए गए सर्वे के मुताबिक 143 जर्जर इमारतें थीं, जो घटकर 114 रह गई थी। विभाग के पास 14 इमारतों की और शिकायतें पहुंची हैं, जिसके बाद यह संख्या 128 हो गई है। अधिकांश जर्जर मकान वाल्ड सिटी में हैं। ये जर्जर मकान सौ साल से भी पुराने हैं। कई मकानों में लोग किरायेदार के तौर पर रहते हैं तो आधे से अधिक इमारतें बंद भी हैं। इसके अलावा कुछ धर्मशाला भी हैं जो अब जर्जर हो चुकी हैं। इनमें ताला जड़ दिए गए हैं। मगर इन जर्जर इमारतों के नीचे दुकानें चल रही हैं। बरसात में होती है कार्रवाई की कसरत बरसात के मौसम में जर्जर इमारतों पर कार्रवाई का क्रम खानापूर्ति से ज्यादा नहीं है। एमटीपी विभाग बरसात के दौरान हर साल सर्वे के काम में जुट जाता है। सर्वे मुकम्मल करने के बाद कुछ लोगों को नोटिस भी भेज दिया जाता है। जर्जर इमारतों को गिराने के लिए निगम की ओर से इक्के-दुक्के प्रयास भी हुए तो कभी किरायेदार व मकान मालिकों के बीच के विवाद की वजह से कभी कानून उनके रास्ते की अड़चन बन जाता है तो कभी लोग। इन इलाकों में हैं जर्जर इमारतें कटड़ा आहलूवालिया, गली कदां, कटड़ा बग्गियां, गली भाटड़ियां, प्रताप बाजार, गुरु बाजार, दर्शनी ड्योढ़ी, खूह बंबेवाला, गली धरेक वाली, घी मंडी गोदाम वाली गली, गली नंबर 2 रामानंद, राम गली, बाजार महां सिंह, जलियांवाला बाग के पास का एरिया, घंटाघर, चील मंडी, माई सेवाराम बाजार, हाल बाजार कैरों मार्कीट, बाजार सिरकी बंदा गली नलके वाली, कटड़ा चड़त सिंह, जंगी शिवाला के समीप, गली तवारियां लोहगढ़, गली लंबा वाली, हवेली जमांदारा, ढाब खटीकां, कटड़ा दूलो, गली जडऊ, किला भंगिया, गली शेखों वाली बेरी गेट, गली खाई वाली, भीड़ा बाजार, गिलवाली गेट, कटड़ा कर्म सिंह,

कटड़ा दल सिंह, गली नागपाल, छत्तीस खुई, चौक हंसली वाला, मित सिंह, गली बेरी वाली कनक मंडी, गली गुज्जरां वाली, बाजार लक्ष्मणसर, बाजार रामगढि़या, गली जय सिंह, चौक बाबा अटल साहिब, चौक परागदास, माहणा सिंह रोड, गली मस्जिद वाली, शास्त्री मार्कीट, पावरकॉम सिटी सर्कल बिल्डिंग आदि इलाके में भी इमारतें हैं। जर्जर इमारतों से साल दर साल हादसे —2018 में दो कच्चे घरों के गिरने से एक बच्ची व बुजुर्ग की मौत हो चुकी है।

—2017 में सात के लगभग जर्जर इमारतें व कच्चे घर बारिश में गिरे, जिसके चलते वेरका में एक मौत हुई।

—2016 में आधा दर्जन जर्जर इमारतों व कच्चे घरों के गिरने से पांच लोग घायल हो गए थे।

—2015 में मानसून में आधे दर्जन से अधिक जर्जर इमारतों के अलावा आधे दर्जन कच्चे छत वाले मकान के गिरने के कारण चार लोगों की जान गई थी।

—2014 में एक दर्जन इमारतों व कच्चे छत वाले मकान के गिरने से छह लोगों की जान गई थी।

—2013 में भी एक दर्जन से अधिक मकानों के गिरने से करीब सात लोगों की मौत हो गई थी।

—2012 में भी एक दर्जन इमारतों के गिरने से चार लोगों की मौत हुई थी। इसमें आठ माह की बच्ची पूनम व युवती कोमल भी शामिल हैं।

—2011 में भी एक दर्जन कच्चे व जर्जर मकान गिरे थे। गुरु का महल में

मां-बेटी दब गई थी। एमटीपी विभाग को कार्रवाई करने को कहा गया है नगर निगम की कमिश्नर कोमल मित्तल ने कहा कि जर्जर इमारतों को लेकर पूरी गंभीरता से एमटीपी विभाग को उन्हें चिन्हित कर कार्रवाई के लिए कहा गया है। बरसात के चलते समय रहते इन पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। जिन जगहों से लोगों की शिकायतें आई हुई है, वहां पहल के आधार पर कार्रवाई होगी ताकि किसी भी प्रकार का कोई नुकसान न हो।

Posted By: Jagran

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