संस, अमृतसर : जय श्रीराम के जयकारों के साथ लंगूर बने बच्चों, बजरंगी सेना के स्वरूप में सजे भक्तों ने श्री हनुमान जी के दरबार में नतमस्तक होकर प्रभु का आशीर्वाद लिया। लंगूर मेले के अंतिम दिन शनिवार को भक्तों ने पूरी धार्मिक परंपरा के साथ लंगूर व बजरंगी सेना के वस्त्र उतार कर श्री हनुमान जी के दरबार में पूजा-अर्चना की। श्री दुग्र्याणा तीर्थ श्री बड़ा हनुमान मंदिर में चल रहा लंगूर मेला शनिवार को समाप्त हो गया।

लंगूर मेले के अंतिम दिन बच्चों ने लंगूर बनने वाले वस्त्रों को उतार कर श्री हनुमान जी के दरबार में नतमस्तक हुए। भक्तों ने श्री हनुमान दरबार में प्रसाद चढ़ाया तथा पूरी परंपरा के साथ वस्त्रों को मंदिर में अर्पित कर दिए। दशहरे पर लंगूर बने बच्चों ने अपने माता-पिता के साथ जाकर रावण को तीर मारकर अंतिम धार्मिक परंपरा को निभाया। इसके बाद शनिवार की प्रात: वस्त्र उतार कर स्नान करके श्री हनुमान के दरबार में नतमस्तक होने के लिए आए तथा ठाकुर जी से लंगूर मेले के दौरान किसी तरह की भूल की क्षमा याचना की।

लंगूर बने बच्चे नैतिक के पिता राजन कनौजिया व माता ज्योति निवासी भगतां वाला ने कहा कि लंगूर मेले में अपने बच्चे को लंगूर बनाकर हम खुश हैं। उनकी मनोकामना थी अपने बच्चे को लंगूर बनाकर इस 10 दिन बच्चे के साथ उन्होंने भी प्रभु की आराधना करके आनंद महसूस किया है। इस दरबार से जो भी सच्चे मन से कोई आराधना करता है उसकी सभी मनोकामना पूरी होती है।

श्री गिरिराज सेवा संघ के प्रधान संजय मेहरा ने कहा कि लंगूर के मेले के दौरान शयन आरती करने वाले भक्तजनों ने पूरा सहयोग किया है। इस अवसर पर शयन आरती के सदस्यों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर रितेश शर्मा, यशपाल, नितिन प्रसाद, सतीश कुमार, रविद्र कुमार, तरुण अग्रवाल व अन्य शामिल थे।

श्री दुग्र्याणा कमेटी के प्रधान एडवोकेट रमेश शर्मा व महामंत्री अरुण खन्ना ने सभी सेवादारों, भक्तों व प्रशासन का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि लंगूर मेले के दौरान कमेटी द्वारा सभी प्रबंध पूरे किए गए थे।

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