जागरण संवाददाता, अमृतसर

सकत्तरी बाग स्थित सेटेलाइट अस्पताल के स्टाफ की कार्यप्रणाली विवादों में घिर गई है। इस सरकारी अस्पताल में एक गर्भवती महिला को ट्रीटमेंट न मिलने की वजह से उसकी कोख में पल रहे शिशु की मौत हो गई। अस्पताल प्रशासन ने अपनी गलती पर पर्दा डालने की मंशा से महिला को गुरुनानक देव अस्पताल में रैफर कर दिया। यहां जाकर मालूम हुआ कि कोख में बच्चे की मौत काफी समय पहले ही हो चुकी है।

रजनी देवी निवासी चौक किरोड़ी गली निहाल ¨सह ने बताया कि वह पिछले नौ माह से लगातार सेटेलाइट अस्पताल से अपनी जांच करवा रही थी। 10 सितंबर को उसे प्रसव पीड़ा शुरू हुई। इसके बाद परिजन उसे सेटेलाइट अस्पताल में ले गए।

रजनी के पति साजन शर्मा ने बताया कि कुछ देर बाद रजनी को लेबर रूम ले जाया गया। इसके बाद एक कर्मचारी बाहर आया और उसने बताया कि रजनी की हालत खराब हो गई है। फिलहाल जच्चा-बच्चा की हालत ठीक है, लेकिन इसे स्पेशल केयर की जरूरत है। यह कहकर स्टाफ ने रजनी को गुरुनानक देव अस्पताल ले जाने को कह दिया।

साजन का आरोप है कि सेटेलाइट अस्पताल ने रजनी को सुबह 9.45 बजे रेफर किया, जबकि रैफरेल स्लिप पर 7.30 बजे का समय लिखा। खुद को बचाने के लिए स्टाफ ने रैफरेल स्लिप पर उस डॉक्टर का नाम लिख दिया, जिसका ट्रांसफर चार माह पूर्व पटियाला हो चुका है।

जब हम गुरुनानक देव अस्पताल पहुंचे तो यहां कोख से मृत बच्चा डिलीवर हुआ। साजन के अनुसार बच्चे की मौत सेटेलाइट अस्पताल में ही हो चुकी थी, पर डॉक्टरों ने अपनी नाकामी छुपाने के लिए उन्हें गुमराह किया। इस मामले की जांच के लिए वह सिविल सर्जन व स्वास्थ्य मंत्री से मांग करते हैं।

स्टाफ पर की जाएगी कार्रवाई

सिविल सर्जन डॉ. हरदीप ¨सह घई ने कहा कि यह कैसे संभव है जो डॉक्टर चार माह पूर्व सेटेलाइट अस्पताल से तबादला करवा चुका है, रैफरेल स्लिप पर उसका नाम कैसे दर्ज किया गया। यह जांच का विषय हैं। मैं स्टाफ को बुलाकर स्पष्टीकरण लूंगा।

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