जागरण संवाददाता, अमृतसर

अमृतसर सहित पंजाब में अस्त-व्यस्त जीवनशैली के कारण लोग लीवर संबंधी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। वर्तमान में लोगों की सक्रिय जीवनशैली में एक ठहराव आ गया है। लोग शारीरिक श्रम करने से बचते हैं, इसलिए लिवर जैसी खतरनाक बीमारियों का शिकार बन रहे हैं। पंजाब में शराब और अन्य मादक पदार्थों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। यह भी लीवर रोगों में वृद्धि का एक बड़ा कारण है। यह विचार लीवर ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. संजय ¨सह नेगी ने शुक्रवार को पत्रकार सम्मेलन में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि सुस्त जीवनशैली के कारण मोटापा, शुगर, हाई ब्लड प्रेशर तथा नशे का सेवन करने से लीवर के रोगियों की संख्या बढ़ी है। निश्चित रूप से यह एक ¨चताजनक बात है।

लीवर कैंसर, फैटी लिवर और हैपेटाइटिस सी की समस्याएं अमृतसर, लुधियाना, ब¨ठडा तथा जालंधर में बढ़ रही हैं। ¨चतनीय पहलू यह है कि लोग इन समस्याओं से अंजान हैं और जब बीमारी पुरानी हो जाती अथवा आखिरी स्टेज पर पहुंच जाती तब काफी देर हो चुकी होती है।

डॉ. संजय ¨सह के अनुसार भारत में लीवर रोग आनुवांशिक है। विश्व भर में सबसे ज्यादा भारतीयों को ही लिवर रोग अपनी गिरफ्त में लेता है। शराब का अत्यधिक सेवन, आहार में जंक फूड का ज्यादा इस्तेमाल व व्यायाम न करना इस रोग का कारण बन रहा है। जिन लोगों को थायरायड, डायबिटीज, कोलेस्ट्रोल आदि की शिकायत हैं, उन्हें लीवर संबंधी विकार होने की संभावना अधिक रहती है। डेमैज लीवर का उपचार सिर्फ लिवर ट्रांसप्लांट ही है। 90 प्रतिशत से ज्यादा सर्जरी सफलत रहती हैं। चिकित्सा जगत में इस विषय पर काफी मंथन हो रहा है कि लीवर ट्रांसप्लांट में आने वाला लाखों का खर्च कैसे कम किया जाए। उन्होंने कहा कि लीवर संबंधी रोगियों की स्क्रि¨नग करने के लिए सोनीपत, कानपुर, अलीगढ़, अलवर, आगरा सहित देश के विभिन्न भागों में ओपीडी सेवाएं आयोजित की गई हैं। अमृतसर में भी मरीजों की स्क्री¨नग का काम शुरू कर दिया गया है।

Posted By: Jagran