नितिन धीमान, अमृतसर: जलियांवाला बाग मेमोरियल सिविल अस्पताल में जल्द ही जेनेरिक दवाएं मिलने लगेंगी। अस्पताल में स्थित देश के पहले जन औषधि केंद में लगा ताला खुलने वाला है। पिछले दस माह से बंद जन औषधि केंद्र को खोलने के पंजाब हेल्थ सिस्टम कारपोरेशन ने आदेश जारी कर दिए हैं। पीएचएससी ने स्पष्ट किया है कि जन औषधि का संचालन रोगी कल्याण समिति ही करेगी। इस आदेश के बाद अस्पताल प्रशासन ने जन औषधि खोलने की रूपरेखा तय कर ली है। सर्वप्रथम स्टाफ की नियुक्ति की जाएगी। इसके बाद लुधियाना या दिल्ली स्थित दवा कंपनियों से करार करके दवाओं की आपूर्ति मंगवाई जाएगी।

दरअसल, सिविल अस्पताल परिसर में स्थित जन औषधि केंद्र जुलाई-2021 में बंद कर दिया गया था। तब यह केंद्र रेड क्रास द्वारा संचालित किया जाता था। रेड क्रास द्वारा नियुक्त किए गए कुछ कर्मचारियों पर यह आरोप लगा था कि वे जेनेरिक दवाओं की आड़ में ब्रांडेड दवाएं बेच रहे हैं। कर्मचारियों ने अस्पताल के बाथरूम में ब्रांडेड दवाएं छिपाकर रखी थीं। यह धांधली होने के बाद रेड क्रास ने इस पर ताला जड़ दिया। पिछले दस महीनों से ताले में जकड़े जन औषधि केंद्र के बाहर प्रतिदिन लोग सस्ती जेनेरिक दवाएं लेने की उम्मीद में आते हैं, पर ताला देख लौट जाते हैं।

दैनिक जागरण ने मामले को उठाया तो सरकार व प्रशासन की आंखें खुलीं

2008 में खुली यह जन औषधि देश का पहला जेनेरिक दवा वितरण केंद्र है। दैनिक जागरण ने इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके पश्चात शासन प्रशासन की आंखें खुलीं और केंद्र खोलने की दिशा में काम शुरू हुआ। हालांकि रेड क्रास चाहता था कि जन औषधि केंद्र उसे मिले, पर अक्टूबर 2021 में तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर गुरप्रीत सिंह खैहरा ने एक पत्र जारी कर यह केंद्र रोगी कल्याण समिति को देने का आदेश जारी किया था, पर इस पर अमल नहीं हुआ। जागरण में समाचार प्रकाशित होने के बाद स्वास्थ्य मंत्री विजय सिगला ने इसका संज्ञान लिया। उन्होंने अमृतसर सहित राज्य के अलग अलग जिलों में बंद जन औषधि केंद्रों की रिपोर्ट मांगी थी और इन्हें शीघ्र शुरू करने के आदेश जारी किए थे। हाल ही में विधायक व एडीसी ने समिति के साथ की थी बैठक

इस मामले को लेकर 11 मई को विधायक इंद्रबीर सिंह निज्जर व एडीसी सुरिदर सिंह ने रोगी कल्याण समिति के सदस्यों व एसएमओ के साथ बैठक की। एडीसी ने रोगी कल्याण समिति को जन औषधि का संचालन करने को कहा था। हालांकि सिविल अस्पताल प्रशासन को इसके लिए पीएचएससी की स्वीकृति भी चाहिए थी, लिहाजा पत्र लिखकर अनुमति मांगी गई जो अब मिल गई है। जल्द स्टाफ की तैनाती के बाद दवाएं मंगवाएंगे: एसएमओ

सिविल अस्पताल के एसएमओ डा. राजू चौहान ने कहा कि पीएचएससी से स्वीकृति मिलने के बाद आगामी एक दो दिन के भीतर रोगी कल्याण समिति के सदस्यों से बैठक की जाएगी। इसके बाद चार फार्मासिस्ट्स व एक कंप्यूटर आपरेटर की तैनाती होगी। दवाओं की आपूर्ति सरकारी स्तर पर निजी कंपनी से की जाएगी। यदि किसी कारणवश दवाएं खत्म हो जाती हैं तो हम स्थानीय स्तर पर भी दवाएं खरीद सकेंगे। केंद्र में कभी 150 से अधिक प्रकार की दवाएं नहीं आईं

जन औषधि केंद्र में 282 प्रकार की दवाएं स्वीकृति हैं। दुर्भाग्यवश कभी भी 150 से अधिक प्रकार की दवाएं नहीं मिलीं। अस्पताल प्रशासन के समक्ष यह भी चुनौती है कि दवाओं का पूरा स्टाक उपलब्ध करवाए जाए। कैंसर व काला पीलिया जैसे खतरनाक रोग की दवाएं भी स्वीकृत हैं, पर मरीजों को मिली नहीं।

Edited By: Jagran