जलियांवाला बाग हत्याकांड की 107वीं बरसी, बलिदानियों को दी श्रद्धांजलि; जानें क्या था रोलेट एक्ट?
जलियांवाला बाग राष्ट्रीय स्मारक ट्रस्ट ने 107वां वार्षिकोत्सव मनाया। मुख्य अतिथि डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि जलियांवाला बाग अत्याचार ...और पढ़ें

अत्याचार के विरोध का प्रतीक है जलियांवाला बाग। फोटो जागरण
HighLights
जलियांवाला बाग 107वां वार्षिकोत्सव ट्रस्ट द्वारा आयोजित।
डॉ. कृष्ण गोपाल ने इसे अत्याचार विरोधी प्रतीक बताया।
रोलेट एक्ट के विरोध में हुआ था नरसंहार।
जागरण संवाददाता, अमृतसर। जलियांवाला बाग राष्ट्रीय स्मारक ट्रस्ट की ओर से 107वां वार्षिकोत्सव जलियांवाला बाग शहीदी श्रद्धांजलि दिवस का आयोजन ट्रस्टी व पूर्व राज्यसभा सदस्य श्वेत मलिक की अध्यक्षता में किया गया। समारोह में मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डा. कृष्ण गोपाल रहे।
डा. कृष्ण गोपाल ने बोले सो निहाल.. का जयकारा लगाकर संबोधित करते हुए कहा कि 13 अपैल 1919 बैसाखी का दिन पूरी दुनिया भर में प्रसिद्ध हो गया है। ब्रिटिश हुकूमत ने जलियांवाला बाग में एकत्रित सैकड़ों लोगों पर अंधाधुंध गोलियां चलवाकर उनकी हत्या कर दी।
इस नरसंहार के बाद देश में आजादी के लिए संघर्ष तेज हो गया, इसलिए जलियांवाला बाग कोई जगह का नाम नहीं, बल्कि अत्याचार के विरोध का प्रतीक है जोकि आजादी की लड़ाई का केंद्र बिंदू बन गया था।
उन्होंने कहा कि ब्रिटिश सरकार अत्याचार करने के लिए तरह-तरह के कानून लागू कर रही थी। देशवासियों की आवाज दबाने के लिए ही रोलेट एक्ट बनाया गया। जलियांवाला बाग में इसी एक्ट का शांतिपूर्वक विरोध करने के लिए लोग एकत्रित हुए थे, जिन पर ब्रिटिश हुकूमत ने गोलियां चलवा दीं।
इतिहास गवाह है कि आजादी की लड़ाई में पंजाब के लोगों का सबसे बड़ा योगदान रहा है। आज के पावन दिवस पर इस कर्मभूमि की मिट्टी को अपने माथे पर लगाने और बलिदानियों को नमन करने आया हूं। जलियांवाला बाग राष्ट्रीय स्मारक ट्रस्ट के ट्रस्टी श्वेत मलिक ने कहा कि ब्रिटिश सरकार ने भारतीयों पर अत्याचार किया।
1857 आंदोलन की चिंगारी ने अग्नि का रूप ले लिया। अंग्रेजों से वह आंदोलन संभाला नहीं जा रहा था, इसीलिए रोलेट एक्ट पास किया गया। इसमें अपील व दलील की कोई गुंजाइश नहीं थी। भारतीयों ने उस एक्ट का डटकर विरोध किया, उसी के तहत 13 अप्रैल 1919 को बैसाखी के दिन जलियांवाला बाग में शांतिपर्व सभा हुई थी।
जनरल एडवायर ने आकर गोलियां चलाने का आदेश दे दिया। उस नरसंहार में हजारों निर्दोष व निहत्थे लोगों की हत्या कर दी गई, बहुत सारे लोग घायल भी हुए। उसके बाद बहुत बड़ा आंदोलन हुआ जिसकी अंग्रेज हुकूमत ने निंदा की। एक हंटर कमेटी गठित हुई जिसने जनरल एडवायर को उस पद से हटा दिया गया। यह सारा नरसंहार माइकल एडवायर के कहने पर हुआ था।
विजिटर बुक में यह लिखा: जलियांवाला बाग को कोटि-कोटि नमन
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डा. कृष्ण गोपाल ने जलियांवाला स्मारक की विजिटर बुक पर लिखा कि जलियांवाला बाग एक स्थान है, जहां से भारत का स्वतंत्रता संघर्ष तेज गति से बढ़ता गया। यह स्थान प्रेरणा, संघर्ष, बलिदान की नयी प्रेरणा का स्त्रोत बन गया। मदन मोहन मालवीय जी ने छह साल लगातार एक रिपोर्ट तैयार की और शिमला में केंद्रीय सभा में जलियांवाला बाग हत्याकांड की गूंज हर कहीं फैल गई।
