जागरण संवाददाता, अमृतसर : गुरुनानक देव अस्पताल (जीएनडीएच) स्थित रेडियो डायग्नोस्टिक विभाग में कार्यरत डॉक्टर एक-एक कर सरकारी नौकरी को अलविदा कर रहे हैं। इस विभाग के प्रभारी डॉ. रमेश चंद्रा ने सोमवार को अचानक वीआरएस (स्वेच्छिक सेवानिवृत्ति योजना) के लिए आवेदन कर दिया। डॉ. रमेश के जाने से रेडियोलॉजी विभाग में डॉक्टरों की भारी कमी उत्पन्न हो गई है। इससे पूर्व इसी विभाग के चार डॉक्टर भी वीआरएस ले चुके हैं। मेडिकल शिक्षा एवं खोज विभाग द्वारा रेडियोलॉजी विभाग में रेजिडेंट्स डॉक्टरों की तैनाती नहीं की जा रही। यहां आठ रेजिडेंट्स के पद रिक्त हैं।

डॉ. रमेश चंद्रा ने सोमवार को वीआरएस की घोषणा की। हालांकि उन्होंने नौकरी छोड़ने का कारण निजी बताया है, लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि विभागीय कामकाज के साथ-साथ कोर्ट केसों में गवाही से वे काफी परेशान थे। डॉ. रमेश एकमात्र ऐसे अधिकारी हैं जिन्होंने रेडियोलॉजी विभाग में रहते हुए मरीजों को हर सुविधा उपलब्ध करवाई। सीटी स्कैन व एमआर की फिल्में खत्म होने पर वह इनकी खरीद करते रहे। सांसद गुरजीत सिंह औजला ने डॉ. रमेश चंद्रा के विशेष आग्रह पर रेडियोलॉजी विभाग को अत्याधुनिक डिजिटल एक्सरे व अल्ट्रासाउंड मशीनें उपलब्ध करवाई थीं। डॉ. रमेश इस विभाग को चौबीसों घंटे कार्यान्वित करना चाहते थे, लेकिन स्टाफ की कमी की वजह से ऐसा संभव नहीं हो पा रहा था। विभाग को कई पत्र लिखने के बावजूद भी इसका समाधान न हुआ तो उन्होंने विभाग को गुडबाय कह दिया। वर्तमान में सीनियर रेजिडेट्स डॉक्टरों के आठ पद खाली

पिछले वर्ष रेडियोलॉजी विभाग में कार्यरत डॉ. नीलम गाबा व डॉ. जेपी सिंह भी वीआरएस लेकर जा चुके हैं। वर्तमान में आठ सीनियर रेजिडेंट्स डॉक्टरों का अभाव है, वहीं असिस्टेंट प्रोफेसर का पद रिक्त है। डॉ. रमेश के जाने से निश्चित ही इस विभग में एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, एमआरआई व सीटी स्केन की सेवाएं प्रभावि होंगी, क्योंकि वह स्वयं अल्ट्रासाउंड व सीटी स्केन करते थे। मरीजों की मुश्किल बढ़ना तय

रेडियो डायग्नोस्टिक विभाग में प्रतिदिन 25 मरीजों का एमआरआइ, 20 का सीटी स्कैन, 100 से अधिक अल्ट्रासाउंड एवं डिजिटल एक्सरे टेस्ट किए जाते हैं। स्टाफ की कमी के बावजूद विभाग में यदि आपातकालीन स्थिति में आधी रात को भी मरीज आ जाए तो डॉ. रमेश चंद्रा उसका टेस्ट करवाते थे। जब विभाग का प्रभारी ही नौकरी छोड़ गया तो बाकी स्टाफ को दिशानिर्देश कौन देगा। जाहिर सी बात है कि मरीजों की तकलीफ बढ़ेगी।

Posted By: Jagran

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