जासं, अमृतसर: कोरोना वायरस ने नए साल पर तीसरी लहर में प्रवेश कर लिया। निश्चित ही तीसरी लहर में संक्रमितों की संख्या तेजी से बढ़ी है। नए साल के पहले 16 दिनों में 4926 संक्रमित रिपोर्ट हो चुके हैं। प्रतिदिन औसतन 250 से अधिक मरीज रिपोर्ट हो रहे हैं। रविवार को कोरोना ने 963 लोगों को संक्रमित किया।

कोरोना का ओमिक्रोन वैरिएंट तेजी से मानवीय शरीर में प्रवेश कर रहा है। बहरहाल, बढ़ते केसों ने डर पैदा किया है, पर राहत भरी बात यह है कि तीसरी लहर में जितने भी संक्रमित रिपोर्ट हो रहे हैं, इनमें अधिकतर क्वारंटाइन में ही स्वस्थ हो रहे हैं। असल में 16 दिनों में मिले मरीजों में से 49 हल्के लक्षणों वाले हैं। मसलन, इन्हें कोरोना आइसोलेशन वार्ड में रखा गया है। वहीं सामान्य लक्षणों से ग्रसित 30 मरीज हैं। वहीं आइसीयू में 12 व वेंटिलेटर्स पर सात हैं। वेंटिलेटर वाले मरीज कोरोना के साथ-साथ कई अन्य बीमारियों से भी पीड़ित हैं।

अब बात इलाज की। कोरोना की दूसरी लहर में जिस इंजेक्शन की सर्वाधिक जरूरत महसूस हुई, वह रेमेडेसिविर इंजेक्शन था। इसे पाने के लिए होड़ सी मच गई। यहां तक कि कालाबाजारी भी हुई। आज हालत विपरीत हैं। तीसरी लहर में रेमडेसिविर इंजेक्शन की उतनी अधिक जरूरत नहीं पड़ी। गुरु नानक देव अस्पताल में जो मरीज उपचाराधीन हैं उनमें से सिर्फ दो मरीजों को ही रेमडेसिविर दिया गया है। शेष मरीज आक्सीजन सपोर्ट व आइसोलेशन वार्ड में हैं। तीसरी लहर में केस जरूर बढ़ रहे पर जिंदगी का खतरा नहीं

गुरु नानक देव अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट व माइक्रोबायोलाजी विभाग के प्रो. डा. केडी सिंह का कहना है कि तीसरी लहर में कोरोना की आक्रामकता कम है। केस जरूर रिपोर्ट हो रहे हैं, पर इससे जीवन हानि का खतरा न के बराबर है। यही वजह है कि हम मरीजों को रेमडेसिविर नहीं दे रहे। मरीजों को दूसरी लहर की तरह निमोनिया की शिकायत नहीं। वहीं आक्सीजन की भी जरूरत नहीं। सीधे शब्दों में कहें तो वायरस फेफड़ों पर प्रहार नहीं कर रहा। बच्चों पर खतरा, बाहर न निकालें

तीसरी लहर का खतरा बच्चों पर मंडरा रहा। एक से 16 जनवरी तक 400 से अधिक बच्चे भी संक्रमण की जद में आए हैं। ऐसे में अभिभावकों को अपने बच्चों को बेवजह बाहर नहीं निकालना चाहिए। जरूरत पड़े तो मास्क जरूर पहनाएं और भीड़ में न ले जाएं।

Edited By: Jagran