पंकज शर्मा, अमृतसर

पंजाब में फूलों की खेती लाभदायक धंधा बनता जा रहा है। गेहूं व धान के फसली चक्र में फंसे किसान आज इसे अपना रहे हैं। जिले में हार्टीकल्चर विभाग भी किसानों को फूलों की खेती को प्रेरित कर रहा है।

फूलों की खेती के इच्छुक किसानों को ट्रेनिग देने के साथ-साथ सब्सिडी पर कई सुविधाएं दी जा रही हैं। यही कारण है कि मौजूदा समय में जिले में फूलों की खेती के अधीन रकबा बढ़ कर 68 हेक्टेयर के करीब पहुंच रहा है। जिले में गुलाब और गेंदे के फूलों की खेती सब से अधिक होती है। गेंदे की डिमांड सबसे अधिक है। इसके अलावा जाफरी, कली , गोंगई , गुलदौदी, राकेट मुखौला और गुलदौदी पी-1 और गुलदौती पी-3 आदि किस्मों की सबसे अधिक खेती हो रही है। अमृतसर में 56 किसान ऐसे हैं जो अन्य फसलों के साथ साथ फूलों की खेती को अपना कर अपनी आर्थिकता को मजबूत कर रहे हैं। जिले में विभिन्न फूलों का उत्पादन सात हजार क्विंटल के करीब है।

देश में लॉकडाउन व पंजाब में क‌र्फ्यू के दौरान फूलों की खेती से जुड़े किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा। प्रत्येक किसान को एक से लेकर दो लाख रुपये का नुकसान हुआ है। क्योंकि विवाह समारोह बंद थे। डेकोरेशन का काम बंद था। धार्मिक स्थलों पर फूल नहीं जा रहे थे। जिले के 60 प्रतिशत उत्पादकों को इस बार गुलदौदी के फूलों की तैयार फसल के खेतों को जोतना पड़ा क्योंकि फूलों को संभाल कर रखने का प्रबंध उनके पास नही है। प्रति एकड़ 80 से 100 क्विंटल तक फूलों का उत्पादन एक सीजन में किसानों को मिलता है।

फूलों की खेती की ट्रेनिंग दी जाती है: जतिंदर सिंह

बागबानी अधिकारी जतिदर सिंह ने बताया कि जिले में पिछले तीन वर्षों में फूलों की खेती करने के रुझान में 20 प्रतिशत वृद्धि हुई है। रोजाना सब्जी उत्पादकों की तरह आमदनी होने के कारण फूल उत्पादक किसानों ने पहले थोड़े रकबे में फूलों की खेती शुरू की। विभाग बढि़या फूलों का बीज किसानों को उपलब्ध करवाने के साथ साथ कारोबार शुरू करने के लिए 40 प्रतिशत तक सब्सिडी भी उपलब्ध करवाता है। किसानों को विशेष ट्रेनिग दी जाती है।

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फूलों का उत्पादन करने वाले किसान बलबीर सिंह ने बताया कि उनके परिवार के पास छह एकड़ भूमि थी। वह दो भाई हैं। धान व गेहूं के फसली चक्र से घर के खर्चे पूरे नहीं होते थे। हालात ये हुए कि बहन की शादी पर लिया कर्ज उतारने के लिए दस वर्ष पहले उन्हें दो एकड़ भूमि बेचनी पड़ी। घर की आर्थिक तंगी दूर करने के लिए वह यूके चला गया। वहां उसने खेतों में काम किया। वहां जिस अंग्रेज के पास काम करता था उसने उसे वापस भारत जाकर फूलों की खेती करने के लिए प्रेरित किया। यूके में चार वर्ष रहने के बाद वह भारत आ गया। उसने भाई सुरजीत के साथ फूलों की खेती शुरू की। आज उनका पूरा परिवार खुशहाल है। दोनों भाई संयुक्त परिवार में रहते हैं। आर्थिक हालत मजबूत हो गई है। विभाग भी समय-समय पर फूलों की खेती में उन्हें हर तकनीकी सहयोग देता है।

Posted By: Jagran

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