अमृतसर। यहां गुरुनानक देव अस्पताल में कर्मियों की असंवेदनशीलता के कारण एक बच्ची की मौत हो गई। वेंटीलेटर न मिलने के कारण तीन माह की इस बच्ची ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। बच्ची को सांस लेने में तकलीफ के कारण पांच दिन पूर्व अस्पताल में दाखिल कराया गया था। बच्ची के माता-पिता कादियां के रहनेवाले हैं। इस घटना से अस्पताल प्रबंधन व कर्मियों के रवैये व कार्यशोली पर गंभीर सवाल खड़ा हो गया है।

बच्ची परी के पिता विजय ओर मां सुनीता ने बताया कि परी को सांस लेने में दिक्कत के बाद वे पांच दिन पहले अस्पताल में लेकर आए थे। उसकी हालत बिगडती गई लेकिन उसे वेटिलेटर नहीं मिला। उन्हाेंने अस्पताल के कर्मियों व डाक्टरों से खूब मिन्नत की, लेकिन बच्ची को वेंटिलेंटर नहीं दिया गया। स्वास्थ्य कर्मियों ने ठीक से बच्ची को देखा तक नहीं। डाक्टरों ने कहा कि निक्कू वार्ड में वेंटीलेटर खाली नहीं है।

दाेनों ने बताया कि जब परी की हालत बहुत बिगड़ गई तो उनके गिड़गिड़ाने पर डॉक्टरों ने परिजनों को एम्बुबैग थमा दिया।एम्बुबैग हाथ से चलने वाली मशीन है, जो मुंह के जरिये फेफड़ों तक सांस पहुंचाती है)। डाक्टरों ने परिजनों को कहा कि इसे पंप करते रहो। कर्मचारियों की लापरवाही व मनमर्जी का यह आलम था कि परिजनों के बार-बार कहने के बावजूद उन्होंने एम्बुबैग भी बच्चीे के मुंह में नहीं लगाया। आखिरकार मासूम परी ने मंगलवार को दोपहर बाद दम तोड़ दिया।

अमृतसर का गुरुनानक देव अस्पताल।

Posted By: Sunil Kumar Jha

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