राजेश शर्मा, खालड़ा

अड्डा अमरकोट के चौक में शनिवार रात ड्यूटी दौरान हादसे का शिकार हुए पंजाब पुलिस के हेड कांस्टेबल इंद्रजीत सिंह का गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया।

इंद्रजीत सिंह (36) के परिवारिक सदस्य इससे पहले भी ड्यूटी के दौरान अपनी जान दे चुके हैं। आतंकवाद के दौर समय 1991 में इंद्रजीत सिंह के पिता हेड कांस्टेबल गुरचरन सिंह की आतंकियों ने हत्या कर दी थी। इसके बाद 2000 में इंद्रजीत सिंह पुलिस में भर्ती हुए थे। इंद्रजीत सिंह के ताया रणजीत सिंह भुल्लर डीएसपी पद से रिटायर्ड हैं। उनका बेटा सतनाम सिंह ड्यूटी के दौरान मारे गए थे। इंद्रजीत सिंह का भाई जसबीर सिंह भी पंजाब पुलिस में एएसआइ है। आतंकवाद के समय उसे भी छह गोलियां लगी थीं, लेकिन उनकी जान बच गई थी। इंद्रजीत सिंह की पत्नी नवदीप कौर ने बताया कि उनके पति बहादुर थे। अपने फर्ज का पालन करते हुए उनकी जान गई है। इंद्रजीत सिंह की बहनों में हरमेश कौर माणकदेके व दलजीत कौर दासूवाल ने बताया कि शनिवार की रात को जब वह ड्यूटी पर था तो उसने फोन कर उनका हालचाल पूछा था। हेड कांस्टेबल इंद्रजीत सिंह अपने पीछे दो लड़कियां कोमलप्रीत कौर (11), एकमजोत कौर (7) और चार वर्षीय लड़का मनजोत सिंह भुल्लर छोड़ गए हैं।

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