जेएनएन, अमृतसर। शहर के एक इलाके में अवैध रूप से चलाई जा रही एक पटाखा फैक्टरी में एक के बाद एक कई धमाके हुए।  विस्‍फोट से फैक्‍टरी पूरी तरह ध्‍वस्‍त हो गई। इससे करीब 10 लाेग लोग हो गए। घटना कोट खालसा इलाके में हुई। धमाके के कारण पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। लोग और पुलिस राहत कार्य में जुटी हुई है। विस्‍फोट से फैक्‍टरी मलबे में तब्‍दील हो गई।

बताया जाता है कि शहर के कोट खालसा क्षेत्र में एक मकान में अवैध रूप से पटाखों की फैक्‍टरी चलाई जा रही थी। सोमवार शाम अचानक फैक्‍टरी में धमाके हो गएअौर जाेरदार आवाज से पूरा क्षेत्र हिल उठा। विस्‍फोट के कारण फैक्‍टरी में आग लग गई और वह पूरी तरह ढह गई।

धमाके के बाद मलबे में तब्‍दील हो गई पटाखा फैक्‍टरी।

इसके बाद वहां चीख पुकार मच गई और लोगों ने फैक्‍टरी के मलबे में दबे लोगों को निकालना शुरू किया। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस भी पहुंच गई। घटना में 10 लाेग घायल हो गए। बताया जाता है कि फैक्टरी का मालिक अवतार सिंह नामक व्‍यक्ति है और व सरकारी टीचर है। उसकी पत्नी स्टाफ नर्स है।

जानकारी के अनुसार, कोट खालसा क्षेत्र के सुंदर नगर की मेन गली में सरकारी टीचर अवतार सिंह बिट्टू की अवैध पटाखा फैक्टरी में सोमवार की शाम हुए धमाके से आसपास के तीन अन्य मकानों की छतें भी धराशाई हो गईं।  इलाके के लोगों, दमकल विभाग और पुलिस की सहायता से चार लोगों को घटना के दो घंटे बाद मलबे से सही सलामत बाहर निकाल लिया गया। फिलहाल मलबे में कुछ और लोगों के दबे होने की चर्चा पर दमकल विभाग देर रात तक घटनास्थल पर राहत अभियान में जुटा रहा।

मेन गली में रहने वाले अजय कुमार ने बताया कि वह पटाखा फैक्टरी के साथ के किराये के मकान में रहता है। सोमवार की शाम वह घर में अपने परिवार के साथ बैठा था कि एकाएक धमाका हुआ और उसके घर की छत नीचे गिर गई। इतने में बारी-बारी से और धमाके हुए और उसके साथ वाले दो मकान भी धराशाही हो गए। इससे क्षेत्र में हड़कंप और भगदड़ मच गई। वह किसी तरह से धराशाही इमारत से बाहर निकला।

पटाखा फैक्‍टरी में धमाके के बाद राहत कार्य में जुटे लोग।

अजय कुमार ने बताया कि उसने देखा कि पटाखा फैक्टरी में धमाके के कारण चारों तरफ धुआं और मिट्टी फैली हुई है। धमाके की आवाज सुनकर घटनास्थल पर काफी संख्‍या में लोग एकत्र हो गए। मौके पर मौजूद लोगों ने पुलिस और दमकल विभाग को दुर्घटना के बारे में जानकारी दी।
 
दमकल कर्मियोंं के पहुंचने से पहले ही लोगों ने घायलाें को निकाला

लगभग आधे घंटे के भीतर दमकल विभाग की तीन गाड़ियां मौके पर पहुंच गई। लेकिन दमकल के पहुंचने से पहले इलाके के लोग बच्ची सहित छह लोगों को मलबे से जख्मी हालत में निकाल चुके थे। फायर फाइटर्स ने फैक्टरी के मलबे के नीचे दबे तीन कर्मियों को सवा घंटे की मशकत के बाद गंभीर हालत में बाहर निकाला। पुलिस ने घायलों की पहचान रमन कुमार, पूजा, गुड्डी, अजय कुमार, सुखमिंदर सिंह के रूप में बताई है। फैक्टरी में काम करने वाले अन्‍य लोगों की अभी तक पहचान नहीं हो पाई है। घटना स्थल पर पहुंचे डीसीपी अमरीक सिंह पवार ने बताया कि जांच के बाद मामला दर्ज किया जाएगा।


फैक्ट्ररी मालिक के रिश्तेदारों ने की बदसुलूकी

घटनास्थल पर कवरेज करने पहुंचे पत्रकारों के साथ फैक्टरी मालिक के परिजनों और रिश्तेदारों ने बदसुलूकी की। कैमरा देखकर वे बिफर पड़े और हाथापाई पर उतारू हो गए। फैक्टरी मालिक अवतार सिंह के भाई ने तो लाठी उठाकर कैमरे की तरफ मारने का  प्रयास किया। लेकिन मौके पर मौजूद पुलिस बल ने उसके हाथ से लाठी छीन ली।

परिवार सिलेंडर फटने की बात कह करता रहा गुमराह

घटना स्थल पर जब पुलिस और मीडिया पहुंचा तो अवैध पटाखा फैक्टरी चलाने वाले परिवार ने सभी को गुमराह करना शुरू कर दिया। पुलिस को बताना शुरू कर दिया कि यहां सिलेंडर फटने से हादसा हुआ है। यहां किसी तरह का कोई बारूद नहीं रखा गया था। लेकिन घटना स्थल से बारूद के चलने की दुर्गंध आ रही थी।

आसपास के घरों के शीशे टूटे

सुंदर नगर की मेन गली और उसके आसपास दो दर्जन से ज्यादा घरों को जोरधार धमाकों से नुकसान पहुंचा है। कई घरों की दीवारों पर दरारें आ गई। कुछ घरों की खिड़कियों और दरवाजों के शीशे तक टूट गए। पटाखा फैक्टरी के बारे में जब इलाके के लोगों ने शोर मचाना शुरू किया तो फैक्टरी मालिक के रिश्तेदारों ने लोगों को भी धमकाना शुरू कर दिया। पुलिस ने कई बार लोगों और आरोपित पक्ष को आपस में आमने-सामने होने से भी रोका।


जीटी रोड पर है पटाखों की बड़ी दुकान

बताया जाता है कि जीटी रोड के पास कोट खालसा में ही सरकारी टीचर की पटाखों की बड़ी दुकान है। लोगों ने बताया कि जहां फैक्टरी है। उसके सौ गज की दूरी पर पटाखों का गौदाम भी रखा गया है। पटाखों को बनाने के बाद गोदाम में बड़े स्तर पर पटाखे स्टोर कर दिए जाते हैं। इसके अलावा यहां सारा साल बारूद का कारोबार तो चलता ही है, लेकिन दीवाली के पास आते ही बारूद से भरे ट्रकों की लाइन लगी रहती है।

कोठी में छुपाए रखा घायल मजदूर

फैक्टरी मालिक के भाई ने एक जख्मी मजदूर को घटना स्थल के सामने अपनी कोठी के अंदर छिपा लिया। लगभग पौने घंटे के बाद जब अन्य मजदूर को बाहर निकाला गया तो उन्होंने एंबुलेंस में चुपके से घर में छुपाए मजदूर को रखवाना चाहा। यह देखकर पुलिस और इलाके के लोग भड़क उठे।

एडीसीपी वालिया खुद जुटे राहत अभियान में

मलबे के नीचे मजूदर और परिवारों के सदस्य दबे थे। बार-बार शोर मच रहा था कि मलबे के नीचे से किसी की आवाज सुनने को मिल रही है। यह सुनकर एडीसीपी जगजीत सिंह वालिया भावुक हो गए उन्होंने अपने हाथों से मलबा हटाना शुरू कर दिया। यही नहीं, उन्होंने लाउड स्पीकर भी पकड़कर इलाके के लोगों से राहत अभियान में जुटने की अपील की।

Posted By: Sunil Kumar Jha